
कोरबा। कोरबा जिले की चार विधानसभा सीटों पर 17 नवंबर को दूसरे चरण में वोट डाले जाएंगे । आचार संहिता के प्रभावशील होने के साथ अक्टूबर के अंतिम हफ्ते में नामांकन दाखिल करने से लेकर जांच की प्रक्रिया होगी। इस बीच प्रमुख राजनीतिक दलों के घोषित और संभावित प्रत्याशियों ने रणनीतिक तैयारी पर विशेष ध्यान दिया है। मुख्य रूप से फोकस इसी बात पर है कि किस तरीके से 1 दिन के भगवान कहे जाने वाले मतदाताओं को साधा जाए। भले ही हर चुनाव में समस्याओं के साथ-साथ विकास मुद्दे होते हैं लेकिन समय के साथ कई प्रकार के बदलाव भी चुनावी रणभूमि में देखने को मिल रहे हैं। अलग-अलग कारणों से लोगों को अपने नेताओं से शिकायत रहा करती है और वह समय-समय पर इसे लेकर नाराजगी जाहिर भी करते हैं। इन सब के बावजूद चुनाव का सीजन आने के साथ इस प्रकार की चीज हवा में गुम हो जाते हैं और फिर एक नया वातावरण और समीकरण तैयार होना शुरू हो जाता है। कोरबा जिले में कोरबा के साथ-साथ तीन और विधानसभा क्षेत्र में मौजूदा चुनाव को लेकर स्थिति कुछ ऐसी ही नजर आ रही है। जिले की चारों सीट पर भारतीय जनता पार्टी के द्वारा प्रत्याशियों की घोषणा कर दी गई है जिन्होंने अपने स्तर पर मतदाताओं से मेलजोल करने के साथ-साथ मैदानी स्तर पर तैयारी प्रारंभ कर रखी। कांग्रेस की ओर से प्रत्याशियों की घोषणा औपचारिक रूप से होना बाकी है लेकिन माना जा रहा है कि सिटिंग विधायकों के साथ-साथ पूर्व में नेतृत्व कर चुके चेहरे ही इन क्षेत्रों से लोगों के सामने प्रस्तुत होंगे। राजनीति के क्षेत्र की जानकारी रखने वाले लोगों का मानना है कि तमाम तरह की औपचारिकताओं के परे जाकर चुनावी चेहरे न केवल अपना काम करते हैं बल्कि कहीं ना कहीं इसमें सफल भी हो जाते हैं। जिले में प्रमुख राजनीतिक दलों का रणनीतिक फार्मूला कुछ अलग ही माना जाता है चाहे इसके लिए किसी भी सीमा तक क्यों न जाना पड़े। उम्रदराज लोगों से लेकर प्रौढ़, युवा, सरकारी कर्मचारी और विभिन्न समाज को अपने पाले में लेने के लिए राजनीतिक दलों के अपने फॉर्मूले हैं जो लगातार जमीन पर देखने को मिल रहे है। वार रूम भले ही अभी नहीं बने हैं लेकिन अंदर ही अंदर चिंगारी को हवा दी जा रही है। जानकारों का कहना है कि अनेक अवसरों पर बहुत सारे क्षेत्र में कामकाज के बजाय दूसरे मुद्दे हावी हो जाते हैं और फिर चुनाव के दौरान कब लोगों का मन बदल जाए इसकी गारंटी नहीं होती, इसलिए भी ऐसे सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए प्रत्याशियों ने अपने काम को जारी रखा है क्योंकि सभी का मकसद चुनाव जीतकर क्षेत्र में अपना वर्चस्व बनाए रखना है।





















