आईआईटी का देश की तरक्की में बढ़ा योगदान, होनहार वैज्ञानिकों के साथ दिए ३000 करोड़ के नए स्टार्टअप

कानपुर, १८ सितम्बर। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव बनाए गए आईआईटी निदेशक प्रो.अभय करंदीकर के साथ संस्थान ने पांच साल में कई कीर्तिमान स्थापित किए। विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज विज्ञानियों को शिक्षण के लिए संस्थान के साथ जोड़ा। शिक्षकों और शोधार्थियों को अनुसंधान के लिए विदेशी शिक्षण संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालयों का सहयोग दिलाने के लिए 65 से अधिक शैक्षिक करार कराए। स्टार्ट अप और नवाचार का ऐसा वातावरण बनाया जिसमें 3000 करोड़ के आर्थिक ढांचे के साथ 100 से अधिक नए स्टार्टअप भी शामिल हुए। आईआईटी कानपुर से बीटेक की शिक्षा ग्रहण करने वाले प्रो.करंदीकर ने निदेशक के तौर पर कार्य के दौरान गुरुदक्षिणा के रूप में संस्थान की झोली में कई उपलब्धियां डालीं। उन्होंने जब संस्थान का नेतृत्व संभाला तो इसकी विश्व रैकिंग 500 से 600 के बीच पहुंच चुकी थी। बदलाव को ऐसे समझा जा सकता है कि 2023 में आईआईटी क्यूएस रैंक 264 पर पहुंच गई। इसी साल एनआईआरएफ ने देश के पांचवें सर्वश्रेष्ठ संस्थान का दर्जा दिया और नवाचार में नंबर वन माना है।आईआईटी के साथ भावनात्मक रिश्ते के दम पर ही उन्होंने पूर्व छात्रों के संगठन को सक्रिय किया। अमेरिका में भी आईआईटी एल्युमिनाइ चैप्टर बनवाया। एल्य़ुमिनाइ के सदस्यों ने बीते दो साल में 297 करोड़ रुपये का दान किया। जो अब तक मिले कुल दान से भी पांच गुणा ज्यादा है। उनके प्रयास से संस्थान में डंगवाल स्कूल आफ मेडिसिन की दिशा में काम चल रहा है। संस्थान में पहली बार अनुसंधान को समर्पित टेक्नोपार्क और आईआईटी कानपुर रिसर्च एंड टेक्नोलाजी पार्क फाउंडेशन का गठन हुआ। मेडिकल स्कूल के साथ ही मेडटेक केंद्र ने संस्थान के शिक्षकों एव शोधार्थियों को नया आयाम दिया है।जिसमें देश और विदेश की बड़ी फार्मा कंपनियों ने रुचि दिखाई और तकनीक विकास व बाजार संबंधी करार भी किए हैं। कोविड -19 के दौरान संस्थान की गतिविधियों को संभालने के साथ ही शिक्षकों एवं शोधार्थियों की मदद से वेंटीलेटर समेत कई उपयोगी उपकरण का अनुसंधान भी कराया। इन विभागों और केंद्रों का शुरू कराया उनके कार्यकाल के दौरान संस्थान में कई विभाग व अनुसंधान केंद्र शुरू हुए जिसमें डिपार्टमेंट आफ़ सस्टेनेबल एनर्जी इंजीनियरिंग, डिपार्टमेंट आफ़ काग्निटिव साइंसेज, स्पेस, प्लेनेटरी एवं एस्ट्रोनॉमिकल साइंसेज एवं इंजीनियरिंग, डिपार्टमेंट आफ़ डिज़ाइन , मेहता फैमिली सेंटर फार इंजीनियरिंगइन मेडिसिन, इंटरडिसिप्लिनरी सेंटर फार साइबर सिक्योरिटी एंड साइबर डिफेन्स आफ क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्टर्स , चंद्रकांता केसवन सेंटर फार एनर्जी पालिसी एंड क्लाइमेट सोलूशन्स, शिवानी सेंटर फार थे नुरतुरे एंड री-इंटीग्रेशन आफ़ हिंदी एंड इतर इंडियन लैंग्वेजेज, अंतरराष्ट्रीय सहयोगी केंद्र राइस-आइआइटीके कोलबोरेटिव सेंटर फार सस्टेनेबल एनर्जी, आईआईटीके -ला ट्रोब अकादमी।

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