
बलौदा । ग्राम डोंगरी मेंमां सरई श्रृंगारिणी का भव्य मंदिर का निर्माण कार्य जोरों पर है । ओडिसा के कारीगर मंदिर के निर्माण कार्य में जुटे हैं। गांव के शंकर लाल साव मंदिर निर्माण का पूरा खर्च वहन कर रहे हैं। मंदिर निर्माण करने का निर्णय समिति ने लिया तब शंकर लाल ने मंदिर निर्माण का पूरा खर्च समिति को देने की बात कही । समिति के लोगों ने उनके निर्णय का स्वागत करते हुए मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करा दिया है। मंदिर निर्माण के लिए ओडिसा के ग्राम बिलामानपुर जिला नयागढ़ के रामचंद्र की टीम यहां मंदिर निर्माण में जुटी है। इसमें राज मिस्त्री शिशिर बिसोइ , लोचन, जीतू , राम बेहरा शामिल हैं। मन्दिर का निर्माण कार्य छत लेबल तक पूरा हो गया है। वही माँ सरई श्रृंगारिणी का मंदिर का गुंबद 25 फीट का रहेगा । अभी लगभग 9 फीट तक निर्माण हो गया है। पहले यह मंदिर 16 से 18 फीट लंबा-चौड़ा था। नया मंदिर 30 फीट लंबा व 20 चौड़ा होगा। माँ सरई श्रृंगारिणी मंदिर समिति के अध्यक्ष मनोहर सिंह ने बताया कि मंदिर के निर्माण में लगभग 90 लाख रुपए का खर्च अनुमानित है। अभी तक लगभग 35 लाख रुपए तक खर्च हो गए हैं। निर्माण सामग्री महंगी होने के कारण लागत बढ़ गई है । डोंगरी के शंकर लाल साव पूरा खर्च दे रहे हैं। मंदिर का निर्माण कार्य 4 माह से चल रहा है । लगभग 1 माह से मंदिर के गुंबद का काम चल रहा है । मंदिर का निर्माण कार्य लगभग 11 महीने में पूरा होने की बात कही जा रही है। मंदिर समिति के कमल किशोर ठाकुर ने बताया कि इस मंदिर के निर्माण कार्य मे ओडिसा के अलावा राजस्थान के मिस्त्री भी आएंगे। माँ सरई श्रृंगारिणी की मान्यता सरई श्रृंगारिणी डोंगरी में सरई पेड़ पर विराजित है। अंचल के लोगों का मां सरई श्रृंगारिणी के प्रति अपार श्रद्धा है। यहां सरई के लंबे-लंबे वृक्ष है । बुजुर्गों के अनुसार लगभग 200 साल पहले यह क्षेत्र पूरा जंगल था । ग्राम भिलाई का एक व्यक्ति इसी सरई के जंगल में पेड़ काटने आया। काफी मशक्कत कर वह सरई पेड़ काट लिया। कटे हुए पेड़ को वह बैलगाड़ी में भरकर अपने गांव ले जाने वाला था लेकिन बैलगाड़ी का पहिया वहीं पर टूट गया। शाम होने की वजह से वह व्यक्ति वापस अपने गांव भिलाई आ गया । दूसरे दिन सुबह होते ही वह व्यक्ति कटे हुए सरई पेड़ को लेने जंगल गया तो देखा कि कटा हुआ सरई पेड़ पुन: खड़ा हो गया था । वह आदमी डरा सहमा अपने गांव पहुंचा और लोगों को आपबीती सुनाई। गांव के कई लोग जंगल में आकर देखे और आश्चर्यचकित हो गए और लोगों ने माना कि यहां सरई पेड़ में देवी का वास है । इसी दिन से इस जगह को लोग मां सरई श्रृंगारिणी के नाम से जानने लगे। यहां मां सरई श्रृंगारिणी देवी सरई पेड़ के रूप में विराजमान है। ऐसी मान्यता है कि जो भी अपना दुख दर्द तकलीफ लेकर मां के दरबार में आते है मां उनकी मुरादे पूरी करती हैं। चैत्र व क्वांर नवरात्रि पर यहां ज्योति कलश प्रज्जवलित कर मां की आराधना की जाती है। 40 वर्ष से जल रही अखंड धुनी और ज्योति सरई श्रृंगारिणी मंदिर में लगभग 40 वर्ष से अखण्ड धुनी एवं अखण्ड ज्योति प्रज्जवलित है। समिति के लोगों ने इस स्थान पर अन्य देवी देवताओं के मंदिर का निर्माण किया है। यह स्थान बलौदा कोरबा मार्ग में सरई श्रृंगार नाम से जाना जाता है। नवरात्र में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां के दर्शन को पहुंचते हैं।






















