जांजगीर। देश भर में प्रसिद्ध नैला के दुर्गोत्सव में इस बार बहुत कुछ पहली बार होगा। 35 सालों के इतिहास में यहां पहली बार 35 फीट ऊंची मिट्टी की मूर्ति बनाई बनाई जा रही है। पहली बार प्रतिमा का विसर्जन भी मौके पर ही किया जाएगा। पवित्र मिट्टी नदी में प्रवाहित की जाएगी। इस मूर्ति को छत्तीसगढ़ के ही कलाकारों द्वारा बनाया जा रहा है। यह भी पहली बार है। इससे पहले कोलकाता के कलाकार बनाते थे। प्रतिमा को मूर्त रूप देने के लिए दर्जनभर कलाकार पिछले दो माह से लगातार मेहनत कर रहे हैं। वहीं पंडाल को अक्षरधाम मंदिर की तर्ज पर बनाया जा रहा है।
यहां पूर्व में प्रतिमा का दर्शन करने के लिए पंडाल आम लोगों के लिए पंचमी को खोला जाता था, लेकिन पहली बार तृतीया तिथि से ही भक्त मां के स्वरूप का दर्शन कर सकेंगे। यहां हर बार पूजा में विविधता रही है। यहां हर साल कुछ न कुछ नया किया जाता है। प्रतिमा भी अलग होती है और पंडाल भी हर बार अलग होता है। अब तक समिति द्वारा मिट्टी की प्रतिमा नही बनवाई जाती थीं।
इस बार मिट्टी की प्रतिमा बनाई गई है। मूर्ति बनाने वाले छत्तीसगढ़ के ही भटगांव के प्रदीप देवांगन की टीम है। इसमें थर्मोकोल का काम भी रायगढ़ अशोक पांचाल द्वारा किया जा रहा है। लाइटिंग की व्यवस्था कोलकाता से की गई है। वहीं अक्षरधाम मंदिर की आकृति बनाने का काम कोलकाता के कन्हैया की टीम पिछले डेढ़ माह से कर रही है। पंडाल 1000 स्कवेयर फीट क्षेत्र में बनाया जा रहा है।
सुरक्षा के लिए लगाए जाएंगे 25 सीसी कैमरे
इस उत्सव को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं। इस बार सुरक्षा की भी अच्छी व्यवस्था की जा रही है। श्री श्री दुर्गा पूजा उत्सव समिति के राजेश पालीवाल ने बताया कि इस बार 25 सीसी कैमरे लगाए जाएंगे। इसके अलावा पुलिस सहायता केंद्र भी खोला जाएगा। जहां पुलिस की व्यवस्था रहेगी। इसके अलावा समिति द्वारा 10 प्राइवेट गार्ड भी रखे जाएंगे। एंबुलेंस व फायर सेफ्टी की भी व्यवस्था रहेगी।
दान से आती है खर्च के लिए राशि- समिति
समिति ने बताया कि इस उत्सव के लिए स्वस्फुर्त लोग दान करते हैं। यह उत्सव पूरी तरह से लोगों के सहयोग पर होता है। उनहोंने बताया कि कुछ सदस्यों द्वारा सहयोग किया जाता है। इसके अलावा सवामनी भी चढ़ाई जाती है। उससे भी सहयोग मिलता है। साथ ही यहां दर्शन के लिए आने वाले भक्तों द्वारा दान पेटी में जो दान किया जाता है।
दिव्यांगों के लिए बैटरी चलित ई-रिक्शा की सुविधा रहेगी
इस बार भीड़ की बढ़ती संभावनाओं के मद्देनजर व्यवस्था बनाने के लिए अलग-अलग रूट से आने वाले लोगों के लिए अलग अलग स्थानों पर पार्किंग की व्यवस्था की गई है। जांजगीर की ओर से जाने वाले बड़ी गाडिय़ों के लिए अग्रसेन भवन के पास पार्किंग की व्यवस्था की गई है। यहां से दिव्यांगों को नैला तक ले जाने के लिए समिति द्वारा 10 बैट्री चलित रिक्शा भी चलवाई जाएगी। बाइक की पार्किंग बस स्टैंड के पास की जाएगी। चांपा, रायगढ़ और सक्ती से आने वालो के लिए- पंजाब नेशनल बैंक के पीछे, शिवरीनारायण, सराईपाली से आने वालो के लिए- बस स्टेंड नैला, बलौदा, पंतोरा और कोरबा से आने वालो के लिए- प्रायमरी स्कूल रेलवे ग्राउंड नैला में की गई है।
एक हजार श्रद्धालु एक साथ कर सकेंगे माता का दर्शन
मां के दर्शन के लिए आने वाले भक्तों की संख्या को देखते हुए अंदर का दायरा भी बढ़ाया गया है। अंदर करीब 4000 स्क्वेयर फीट जगह बनाई जा रही है। समिति के सदस्यों के अनुसार यहां एक बार में एक हजार लोग एक साथ दर्शन कर सकेंगे।