कोरबा। नेशनल हाइवे संख्या 149 बी के दायरे में आने वाले बड़े हिस्से में की गई भू अर्जन की प्रक्रिया को लेकर ग्रामीणों ने कई सवाल उठाये है। भू विस्थापितों ने कहा कि भू अर्जन और इसे लेकर दावा आपत्ति किये जाने को लेकर विस्थापितों को व्यक्तिगत सूचना नहीं दी गई। इसके साथ ही पत्रक में कई तरह की कांट-छांट गई है। जो संदेह को उत्पन्न करने वाली है।
विनय मोहन परासर सहित कई भू विस्थापितों ने आज प्रेस कॉन्फे्रंस में चौकाने वाली जानकारी दी। कटघोरा -चांपा तक बनाये जाने वाले नेशनल हाइवे 149 बी के लिए कई गांव की जमीन अधिग्रहित की जा रही है। इसके पिछले वर्षों में अधिसूचना प्रकाशित की गई। भू विस्थापितों का कहना है कि भू अर्जन अधिनियम के प्रावधान के अंतर्गत 31 अगस्त 2018 को सूचना वेब पोर्टल में डाली गई और समाचार पत्र में प्रकाशित किया गया। लेकिन प्रभावित लोगों को व्यक्तिगत सूचना नहीं दी गई। इससे वे दावा आपत्ति नहीं कर सके। कहा गया है कि भू अर्जन अधिकारी द्वारा भू अर्जन प्रकरण दर्ज करते हुए राजस्व आदेश परिपत्र में प्रकरण से संबंधीत विवरण दर्ज करते हुए कम्प्यूटर से टाईप कराया गया है। जिसमें प्रकरण दर्ज करने की तिथि को हाथ एवं पेंसिल से लिखा गया है, जो संदेह उत्पन्न करता है। यह भी कहा गया कि भू अर्जन प्रकरण में पारित अवार्ड को कम्प्यूटर से टाईप कराय गया है लेकिन अवार्ड पारित करने की तिथि हाथ से लिखी गई है जो संदेह पैदा करती है। याद रहे 149बी नेशनल हाईवे मेंं सरगबुंदिया, सराईपाली, पहंदा, उरगा और गई गावों की जमीन ली जाएगी।