
बिश्रामपुर। एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र की श्रमिक कालोनी के आवासों में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण को लेकर क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा एक बार फिर बेदखली की कार्रवाई करने कंपनी आवासों का सर्वे कराया जा रहा है। वहीं एसईसीएल प्रबंधन कंपनी आवासों को अतिक्रमण मुक्त करने बेदखली की नोटिस देना भी प्रारंभ कर दिया है। अभी तक करीब चार दर्जन अतिक्रमणकरियो को नोटिस दी जा चुकी है। वर्तमान में कराए जा रहे सर्वे के दौरान 73 शासकीय, पुलिस अधिकारी व कर्मचारियो के कंपनी आवासों में अवैध रूप से निवास करने की पुष्टि हुई है।
एसईसीएल की श्रमिक कालोनियों में स्थित कंपनी आवासों के साथ ही कंपनी के स्वामित्व की भूमि में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर बड़ी-बड़ी इमारतें खड़ी करने को लेकर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सितंबर 2016 में निर्णय सुनाया और एसईसीएल प्रबंधन को अतिक्रमणकरियो के विरुद्ध निर्धारित समय सीमा में बेदखली की कार्रवाई करते हुए कंपनी के आवासों एवं उसके स्वामित्व की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया था। हाईकोर्ट के आदेश के पालनार्थ क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा अभियान चलाकर डेढ़ सौ से अधिक कंपनी के आवासों को अतिक्रमणमुक्त कराया भी गया था। उसके बावजूद काफी संख्या में पुलिस एवं जिला प्रशासन के अधिकारी तथा कर्मचारियों के अलावा अनाधिकृत बाहरी लोग एसईसीएल के आवासों में अवैध रूप से रह रहे हैं। इतना ही नहीं जिला प्रशासन द्वारा आवंटित एसईसीएल के आवासों में रह रहे शासकीय सेवकों से आवासों की किराया वसूलने प्रबंधन ने किराया राशि निर्धारित कर किराया राशि की वसूली करने पूर्व में उन्हें नोटिस भी थमाया था। नोटिस में इस बात का भी उल्लेख किया गया था कि किराया राशि की अदायगी नहीं करने पर आवास आवंटन निरस्त करने के साथ ही नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, लेकिन बाद में क्षेत्रीय प्रबंधन की यह कार्रवाई टांय टांय फिस्स हो गई।फिर शुरू हुआ सर्वे, नोटिस भी हो रही जारी-इधर कंपनी आवासों में अतिक्रमण को लेकर कंपनी मुख्यालय से जारी निर्देश के बाद एक बार फिर क्षेत्रीय प्रबंधन एक्शन मोड में नजर आ रहा है। कंपनी के सुरक्षा विभाग द्वारा एसईसीएल की आवासीय कालोनियों में डोर टू डोर पहुंचकर कंपनी आवासों में रहने वाले परिवारों की जांच पड़ताल कर सर्वे किया रहा है। बड़ी संख्या में कंपनी आवासों में अवैध रूप से रहने वालों की जानकारी मिलने से प्रबंधन परेशान नजर आ रहा है। अभी तक किए गए सर्वे में 73 में प्रशासनिक व पुलिस के अधिकारी व कर्मचारियों के अवैध रूप से कब्जा कर रहने की जानकारी सुरक्षा विभाग को प्राप्त हुई है। इस बात की सुरक्षा विभाग ने भी पुष्टि की है। इसके अलावा भी बड़ी संख्या में गैर कालरी कर्मियों ने कंपनी आवासों में कब्जा कर रखा है। इधर सुरक्षा विभाग ने बेदखली की कार्रवाई करने चार दर्जन से अधिक अतिक्रमण कार्यों को नोटिस भी जारी कर दी है। जिन आवासों में ताला बंद है, उन आवासों के बाहर नोटिस चस्पा करने की भी कार्रवाई जारी है। चार करोड़ से अधिक किराया राशि की नही हुई वसूली-संबंधित सूत्रों की माने तो कंपनी के आवासों में अवैध रूप से रह रहे बाहरी लोगों के अलावा जिला प्रशासन द्वारा आवंटित एसईसीएल के आवासों में रह रहे शासकीय सेवकों से वसूल की जाने वाली राशि डेढ़ करोड़ रुपये से बढक़र चार करोड रुपए से अधिक हो गई है।
प्रबंधन को तत्कालीन पुलिस अधीक्षक से 10 लाख रुपए से अधिक किराया राशि वसूल करनी है। लंबे समय पूर्व किराया राशि वसूली के लिए एसईसीएल प्रबंधन द्वारा जिन लोगों को नोटिस जारी किया गया था, उनमें एक एएसआई से करीब साढ़े आठ लाख रुपए, पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष एवं कोषालय अधिकारी से सात लाख रुपए से अधिक की राशि, उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं से करीब पौने सात लाख रुपए की किराया राशि वसूल किया जाना था। इनके अलावा प्रशासनिक एवं पुलिस विभाग के अनेक अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नोटिस जारी की गई थी। किराया वसूली का मामला बाद में ठंडा बस्ते में डाल दिया गया। फरवरी 2018 में किराया राशि वसूलने के लिए क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा जारी नोटिस बेअसर रही।






















