कोरबा। कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी एसईसीएल दीपका में खुली खदान के लिए अर्जित भूमि के असली मालिक नौकरी, मुआवजा व अन्य सुविधाओं के लिए दर-दर की ठोंकरे खा रहे हैं जबकि फर्जी मालिक एशो-आराम की जिंदगी जी रहे हैं।
इन लोगों ने जालसाजी कर एसईसीएल में नौकरी प्राप्त कर ली है और लगातार लाखों रुपए मासिक पगार उठा रहे हैं। इसकी शिकायत एसईसीएल प्रबंधन के साथ-साथ पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों से कई बार की जा चुकी है किंतु अधिकारी कार्रवाई के बजाय जालसाजों का साथ देने में जुटे हुए हैं जिससे पीडि़तों की परेशानी और भी बढ़ गई है। अब उसने नए पुलिस महानिरीक्षक का दरवाजा खटखटाते हुए उनसे न्याय की गुहार लगाई है। आईजी की ओर से उचित कार्रवाई का आश्वासन मिला है। बिलासपुर कार्यालय में दिनांक 11 जनवरी को नए आईजी रतनलाल डांगी को प्रेषित शिकायत में आकाश कुमार दिव्या पिता स्व. कलेश्वर दिव्या निवासी पुराना गुरु घासीदास चौक भदरापारा बालको ने कहा है कि उसके पिता स्व. कलेश्वर दिव्या पिता स्व. गोविंद राम दिव्या के स्वामित्व व आधिपत्य की भूमि कोरबा जिला अंतर्गत ग्राम सिरकी तहसील कटघोरा में खाता नं. 69, खसरा नं. 107, 135 कुल रकबा 16.45 एकड़ स्थित थी। उक्त भूमि को एसईसीएल दीपका द्वारा अर्जित किया गया था। इस भूमि के एवज में बृजलाल भारद्वाज, निवासी चाकाबुड़ा जवाली, मनहरण लाल नारंग पिता डहारू नारंग निवासी सिरकी, मधुकर प्रसाद निवासी प्रेमनगर सुराकछार तथा अवधेश कुमार भारद्वाज पिता स्व. केजऊ निवासी चाकाबुड़ा जवाली द्वारा झूठी जानकारी देते हुए एसईसीएल दीपका में फर्जी तरीके से नौकरी हासिल कर लिया है और लगातार ड्यूटी कर रहे हैं। जिस समय उसके पिता की भूमि को एसईसीएल प्रबंधन द्वारा अर्जित किया गया, उस समय सभी भाई-बहन नाबालिग थे, जिसका फायदा फर्जी नौकरी हासिल करने वाले उपरोक्त लोगों ने उठाया। चूंकि हम सभी भाई-बहन अत्यंत गरीब हैं। परिवार में आय का कोई साधन नहीं है। हम लोगों द्वारा उक्त व्यक्तियों से संपर्क किये जाने पर उनके द्वारा शिकायत किये जाने पर जान से मारने की धमकी दी गई। थाना दीपका द्वारा दिनांक 19 दिसंबर 2020 को बयान दर्ज किया परंतु आरोपी बृजलाल, मनहरण, मधुकर एवं अवधेश पर पुलिस द्वारा किसी प्रकार की कोई कार्रवाई नहीं की गई, उल्टा लेनदेन कर आरोपियों को छोड़ दिया गया।
पुलिस अधिकारियों द्वारा आरोपियों की मदद कर प्रार्थी को घुमाया जा रहा है। पीडि़त व्यक्ति की इस शिकायत को आईजी ने गंभीरता से लिया है और मामले की विस्तृत जांच कराकर दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है। अब देखना यह है कि पीडि़त को न्याय मिलता है अथवा आईजी का आश्वासन भी अन्य अधिकारियों के आश्वासन की तरह मात्र आश्वासन बनकर रह जाता है।