सख्ती नहीं दिखाये जाने से बढ़ा मनोबल
कोरबा। आवासीय योजनाओं को लेकर नगर निगम और सरकार न केवल भारी भरकम निवेश कर रही है बल्कि लोगों को इसका लाभ लेने के लिए तैयार करने में लगी है। इसके विपरीत कोरबा में खाली पड़ी सीएसईबी की मूल्यवान जमीन पर अतिक्रमण कार्यों की नजर टिकी है। ट्रांसपोर्ट नगर रिकांडो रोड क्षेत्र में हालात ऐसे बन गए हैं कि सीएसईबी द्वारा किए गए फेसिंग को तोडऩे के साथ यहां अतिक्रमण हो रहा है। पिछले दिनों भी ऐसी हरकत हुई थी, जिस पर ध्यान नहीं दिया गया। सख्ती नहीं दिखाने के कारण अतिक्रमण करने वालों का मनोबल बढ़ गया।
बुधवारी से ट्रांसपोर्ट नगर की तरफ जाने वाले रिकांडों पर नेहरू नगर के आगे सीएसईबी की काफी जमीन खाली है। इसके एक तरफ से सीएसईबी और बालको की रेल लाइन है। संबंधित जमीन का अधिग्रहण सीएसईबी ने कई वर्ष पहले अपने कार्यों के लिए किया था। जमीन का कुछ हिस्सा नजुल का होना बताया गया है। भविष्य में इसका उपयोग सरकारी प्रयोजन से हो सकता है। इस लिहाज से जमीन को सुरक्षित करने के लिए सड़क से लगकर वारवेट वायर से फेसिंग कराई गई। इसके साथ ही यहां पौधरोपण कराया गया। ताकि पर्यावरण बेहतर रहे और जमीन बचाई जा सके। दिखावे के तौर पर इस काम को किया गया और बाद में निगरानी बंद कर दी गई। इसका परिणाम यह हुआ कि बारी बारी से जमीन को हड़पने की प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई। अवैध वाहन स्टैंड से लेकर कई दुकाने खुल गई। धीरे-धीरे इनका दायरा बढ़ता चला जा रहा है। संख्या में वृद्धि के साथ अन्य लोगों की नजर जमीन को हथियाने पर है। वे भी नहीं चाहते की अच्छे भले अवसर को छोड़ा जाए। गुरूवार को इसी हिस्से में अनेक लोगों ने संगठित तरीके से जमीन को कब्जाने में पूरी ताकत झोंक दी। देखते-देखते यहां कई अस्थाई निर्माण कर लिए गए तो कहीं पेड़ो को समाप्त कर जमीन को अपने लिए चिन्हांकित कर लिया गया। दरअसल लोगों को मालूम है कि कोरबा में जमीन और मकान के भाव आसमान पर है। ऐसे में जहां भी खाली जमीन पड़ी दिख रही है, किसी भी राजनेता के नाम की धौंस देकर इसे कब्जाने में कोई हर्ज नहीं है। आश्चर्य की बात यह है कि इस तरह हो रहे अतिक्रमण को लेकर अधिकारी मौन है। इससे ऐसा लगता है कि या तो वे अतिक्रमणकर्ताओं के आगे बेबस है अथवा उनके आंकाओं ने मुंह बंद कर दिया है।
सीएसईबी को लिखा है पत्र
जिस जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है, उसका संबंध सीएसईबी है। इस हिस्से में पूर्व में दो बार नगर निगम अपने प्रयास से अतिक्रमण हटा चुका है। वर्तमान में इस तरह के कार्यों की जानकारी मिलने पर सीएसईबी को पत्र लिखा है। सीएसईबी को कहा गया कि वह अपनी जमीन की सुरक्षा करे।
अरूण शर्मा
कार्यपालन अभियंता नगर निगम
कृष्णा नगर, हेलीपेड और मानिकपुर ग्रीन बेल्ट को भी नहीं छोड़ा
इससे पहले एसईसीएल हेलीपेड के पीछे, नेहरू नगर छात्रावास के आसपास और एसईसीएल कालोनी में कृष्णा नगर तथा मानिकपुर के मुक्तिधाम के नजदीक विकसित किए गए ग्रीन बेल्ट में बेजा कब्जा की बाढ़ आ गई। लोकसभा और नगरीय निकाय चुनाव के कार्य में सरकारी अमला के व्यस्त रहने का भरपूर फायदा ऐसे तत्वों ने उठाया। उनके हौसले के कहने ही क्या, जिन्होंने दिन के उजाले में इस क्षेत्र में हरे-भरे सरई सहित अन्य प्रजातियों के विशाल वृक्षों को समाप्त कर दिया। मौके से इन्हें पार करने के साथ समतलीकरण करने के बाद कच्ची झोपडिय़ां तैयार कर ली गई। जब तक सरकारी अमला यहां पहुंचता , उनके सामने वृक्षों के बजाय केवल ठूठ बचे हुए थे। इससे पुष्टि हुई कि पहले तस्वीर कुछ और थी। उस दौरान मीडिया को अतिक्रमण करने वालों ने बताया था कि कई वर्षों से काशीनगर और बुधवारी और दूसरे क्षेत्रों में रहवास की व्यवस्था है। लंबे समय तक ऐसा नहीं हो सकता। इसलिए खाली पड़ी सरकारी जमीन को हथियाने की मानसिकता बनाई गई।