कोरबा /देशभर के बिजली प्लांटों में कोयला संकट से सरकार के माथे पर चिंता की लकीर है। यही कारण है कि केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी बुधवार को कोरबा जिले में संचालित एसईसीएल के मेगा परियोजनाओं का दौरा करने पहुंच रहे हैं। कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी बुधवार सुबह 9 बजे विशेष विमान से दिल्ली से 11 बजे बिलासपुर पहुंचेंगे।
यहां से वे हेलीकॉप्टर से गेवरा हेलीपैड पहुंचेंगे। 11.30 बजे एसईसीएल के गेवरा-दीपका और कुसमुंडा खदान का निरीक्षण करेंगे और अफसरों के साथ बैठक लेकर कोयला उत्पादन और डिस्पैच के संबंध में दिशा-निर्देश देंगे। एसईसीएल की गेवरा खदान एशिया की सबसे बड़ी कोल माइंस है। वहीं कुसमुंडा और दीपका खदान भी एसईसीएल के मेगा प्रोजेक्ट है।

इन तीनों कोयला खदानों से एनटीपीसी, राज्य पावर जेनरेशन कंपनी के अलावा देश के अन्य औद्योगिक इकाइयों को कोयला की आपूर्ति होती है। कोल इंडिया का लक्ष्य पूरा करने में इन तीनों खदानों की बड़ी भूमिका है, लेकिन वर्तमान में ये सभी परियोजनाएं अपने तय उत्पादन लक्ष्य से पीछे चल रहे हैं। केंद्रीय कोयला मंत्री प्रह्लाद जोशी एसईसीएल के खदानों का दौरा करने के बाद यहां से बिलासपुर फिर रांची के लिए रवाना होंगे।

कोयला मंत्री का दौरा क्यों

कोयला मंत्री जोशी का यह प्रवास कोरबा से होने वाले उत्पादन में बड़ी गिरावट को लेकर है। एक अधिकारी के मुताबिक कोल इंडिया की कोयला खदानें सामान्य स्थिति में लगभग साढ़े सात लाख टन कोयला उत्पादन करती है। इसमें गेवरा, कुसमुंडा, दीपका से ही सवा दो लाख टन कोयला निकलता है, जो अभी इससे करीब आधा ही निकल रहा है। यह स्थिति कोयला संकट को गंभीर बना रही है। कोयला संकट की आहट तो पिछले दो माह से थी। यही वजह है कि इस दौरान कोल सेक्रेटरी, कोल इंडिया के चेयरमैन का दौरा हुआ था।

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