जांजगीर-चांपा। छतीसगढ़ के सभी जिला अस्पतालों में कैंसर मरीों के लिए कीमोथेरेपी एवम पैलेटिव केयर सेवा सुविधा शुरू किया जा रहा है। इसके पहले चरण में प्रदेश के 4 जिलों का चयन किया गया है। जिसमें बिलासपुर, मुंगेली, बेमेतरा के साथ ही जिला अस्पताल जांजगीर का भी चयन किया गया है। जिसके तहत जिले के कैंसर रोगियों की पहचान कर उन्हें अपने निकटस्थ जिला अस्पतालों में ही कीमोथेरेपी के इलाज की सुविधा मिल सकेगी।
जिला अस्पताल पर कैंसर कीमोथेरेपी एवं पैलेटिव केयर में प्रशिक्षण प्राप्त डॉक्टरों द्वारा सेवा दिए जाने पर कैंसर मरीों को विभिन्न सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। इसके तहत स्थानीय स्तर पर कैंसर परामर्श के लिए चिकित्सा अधिकारी उपलब्ध होंगे, जो कैंसर की पहचान , इला और नियमित जांच एवं अन्य किसी भी प्रकार की कैंसर संबंधी परेशानी में मार्गदर्शन देंगे । स्थानीय स्तर पर कैंसर के लक्षणों की त्वरित पहचान कर पाना संभव हो पाएगा । कैंसर कीमोथेरेपी प्रारंभ होने से कैंसर कीमोथेरेपी की महंगी दवाइयां स्थानीय अस्पतालों में मुफ्त में उपलब्ध कराई जाएंगी । एक कैंसर के मरी के कीमोथेरेपी में लाखों का खर्च बैठ जाता है। जिससे एक मरी के साथ- साथ परिवार की भी आर्थिक रूप से कमर टूट जाती है । एनसीडी प्रोग्राम के तहत मरीों को स्थानीय अस्पतालों में कैंसर कीमोथेरेपी का अत्यंत महंगा इला मुफ्त में मिल पायेगा । कैंसर का इला कई चरणों मे होता है। जिससे मरीों को बार-बार बड़े शहरों के बड़े-बड़े अस्पतालों में च- र काटना पड़ता है। जिससे मरीों के साथ – साथ परिवार की अत्यधिक समय की हानि होती है । स्थानीय स्तर पर कैंसर कीमोथेरेपी की सेवा प्रारम्भ होने पर समय की बचत होगी। कैंसर के अंतिम स्टेज में एक विशेष प्रकार की इला की जरूरत होती है, जिसे पैलेटिव केयर के नाम से जाना जाता है । यह सुविधा भी स्थानीय जिला अस्पताल में चिकित्सा अधिकारियों द्वारा दी जाएगी । जिला अस्पताल के जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ इकबाल हुसैन ने बताया कि जिला अस्पतालों में कैंसर मरीों के लिए कीमोथेरेपी एवम पैलेटिव केयर सेवा सुविधा शुरू किया जा रहा है। इसके लिए राज्य के 22 जिले के चिकित्सा अधिकारियों को मध्यप्रदेश के उज्जौन में स्थित राज्य कैंसर यूनिट में कैंसर कीमोथेरेपी एवम पैलेटिव केयर की ट्रेनिंग दी गई है। इसके साथ ही सभी जिलों के स्टॉफ नर्सों को भी ट्रेनिंग दी गई है । यह सुविधा शुरू किया जा रहा है । वर्तमान में मध्यप्रदेश ,ओड़ीसा , राजस्थान ,गुजरात , उत्तरप्रदेश , बिहार और हिमाचल प्रदेश के जिला अस्पतालों में कैंसर मरीों के लिए कीमोथेरेपी एवम पैलेटिव केयर की सुविधा है। कैंसर एक भयानक बीमारी है लेकिन प्राम्भिक स्टेज में पहचान होने पर कैंसर का इलाज संभव है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में सामाजिक और स्वास्थ्य जागरूकता के अभाव में जिस प्रकार एनीमिया जैसी बीमारी की पहचान करने में समय लग जाता है, उसी प्रकार कैंसर बीमारी की पहचान और भी काफी लेट से हो पाती है क्योंकि इसके प्रारंभिक लक्षण की जांच कर कैंसर की पहचान करने के लिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टर्स ही नहीं है और न ही पहचान करने के लिए स्थानीय स्तर पर कोई जांच सुविधा है। न ही किसी प्रकार के जांच उपकरण हैं और न ही किसी प्रकार की दवाइयां। इसीलिए बड़े-बड़े शहरों में कैंसर बीमारी के पहचान और इला के लिया जाना पड़ता है। क्योंकि कैंसर मरीों के नियमित जांच के लिए भी नदीकी अस्पतालों में न तो कोई विशेषज्ञ चिकित्सक हैं, न जांच की सुविधा और न ही किसी प्रकार की कैंसर की दवाईयां उपलब्ध है। इसके साथ-साथ कैंसर का इलाज भी काफी महंगा होता है। बार-बार महंगा इला करा पाना हर किसी के लिए सम्भव नहीं हो पाता है। इसलिए स्थानीय स्तर पर विशेषज्ञ डॉक्टरों, जांच सुविधाओं एवम दवाइयों का अभाव, बड़े-बड़े अस्पतालों पर निर्भरता, इलाज में अत्यधिक समय का लगना , भारी आर्थिक बोझ और स्थानीय स्तर पर जांच के अभाव के कारण कैंसर एक बड़ी स्वास्थ्य समस्या बन चुका है । प्रदेश के जिला अस्पतालों में 22 फरवरी से कैंसर परामर्श एवं कीमोथेरेपी कैंप का आयोजन किया जा रहा है । इसी कड़ी में जिला अस्पताल जांजगीर में भी शनिवार को कैंसर परामर्श एवं कीमोथेरेपी कैंप का आयोजन किया जाएगा। जिसमें कैंसर विशेषज्ञ डॉ दिनेश पेंढारकर और मध्यप्रदेश के राज्य नोडल कैंसर ऑफिसर एवम ट्रेनर डॉ सी. एम. त्रिपाठी अपनी सेवा देंगे और अपने विश्वस्तरीय टीम के साथ छत्तीसगढ़ में भी कैंसर कीमोथेरेपी एवम पैलेटिव केयर प्रोग्राम की नींव रखेंगे।
कैंसर मरीों के इला तीन तरह से होता है सर्जरी , रेडियोथेरेपी और कीमोथेरेपी। अधिकांश कैंसर मरीों को किसी न किसी प्रकार से कैंसर के कीमोथेरेपी की आवश्यकता होती ही है । कीमोथेरेपी से तात्पर्य है कि दवाइयों के माध्यम से कैंसर का इलाज करना । जबकि रेडियोथेरेपी में रेडिएशन के माध्यम से कैंसर का इलाज किया जाता है । जिसे बोलचाल की भाषा में सेकाई कहा जाता है।