कोरिया मोदक: स्वस्थ मातृत्व और पोषण की अनूठी पहल

कोरिया बैकुंठपुर। जिले में गर्भवती महिलाओं और उनके गर्भस्थ शिशुओं के पोषण को ध्यान में रखते हुए कोरिया मोदक लडडू निर्माण व वितरण की शुरुआत की गई है। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मार्गदर्शन और जिला प्रशासन की दूरदर्शी सोच व पहल से योजना के अंतर्गत लगभग 2,000 गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन पोषणयुक्त मोदक लड्डू उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
कलेक्टर श्रीमती चंदन त्रिपाठी ने कहा, कोरिया जिले की अधिकांश गर्भवती महिलाओं को संतुलित और पौष्टिक आहार की आवश्यकता है। माताओं का अच्छा स्वास्थ्य ही स्वस्थ और मजबूत अगली पीढ़ी की नींव रखता है। इसी सोच के साथ हमने कोरिया मोदक लड्डू निर्माण व वितरण कार्य शुरू किया है, ताकि जच्चा और बच्चा दोनों को आवश्यक पोषण मिल सके। उन्होंने यह भी बताया कि, प्रसव पूर्व देखभाल (एएनसी जांच) गर्भावस्था के दौरान होने वाली गंभीर जटिलताओं का पता लगाने में मदद करती है, जिससे मातृ और शिशु मृत्यु दर में कमी आती है। इसी कारण यह जांच शत-प्रतिशत सुनिश्चित की जा रही है और संस्थागत प्रसव को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। बैकुंठपुर विकासखंड के ग्राम आनी में महिला स्व-सहायता समूहों की 25 महिलाएं प्रतिदिन 9,000 से 10,000 मोदक लड्डू तैयार कर रही हैं। इन लड्डुओं को सत्तू, रागी, बाजरा, ज्वार, गोंद, सोंठ, तिल, मूंगफली, इलायची और घी जैसी पौष्टिक सामग्रियों से बनाया जा रहा है। प्रत्येक लड्डू 30 ग्राम का होता है और इसमें आवश्यक प्रोटीन, आयरन, कैल्शियम सहित अन्य पोषक तत्व शामिल हैं, जो गर्भवती महिलाओं के लिए अत्यंत लाभकारी हैं। प्रत्येक गर्भवती महिला को 15 दिन के लिए 30 मोदक लड्डू (प्रति दिन दो) दिए जाते हैं। लड्डू आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित किए जाते हैं और जो महिलाएं केंद्र तक नहीं आ सकतीं, उन्हें पोषण संगवारी समूह की महिलाएं घर-घर जाकर लड्डू खिलाते हैं। इस योजना से गर्भवती माताओं को पोषण तो मिल ही रहा है, साथ ही ग्रामीण महिलाओं को रोजगार का नया अवसर भी मिल रहा है। कलेक्टर ने कहा, यह योजना केवल माताओं और शिशुओं के स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे ग्रामीण महिलाएं आत्मनिर्भर भी बन रही हैं। वे आर्थिक रूप से सशक्त होकर अपने परिवार और समाज के विकास में योगदान दे रही हैं। कलेक्टर श्रीमती त्रिपाठी और सीईओ डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि हमने इस विशेष लड्डू का नाम मोदक इसलिए रखा है क्योंकि यह सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि आयुर्वेद में इसे औषधि के रूप में भी माना गया है। चरक संहिता में अभयादि मोदक और शतावरी मोदक का वर्णन है, जो स्वास्थ्यवर्धक होते हैं। गुड़ से बना मोदक पाचन सुधारता है और मेटाबॉलिज्म को तेज करता है। जिला पंचायत के सीईओ डॉ. आशुतोष चतुर्वेदी ने कहा, हमारी प्राथमिकता कुपोषण को जड़ से मिटाना है, साथ ही गर्भ में पल रहे शिशु को जन्म से पहले ही संपूर्ण पोषण देना है ताकि वह मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बन सके।

RO No. 13467/9