कुछ पटवारियों के बार-बार तबादले, दागी को मलाईदार जगह में भेजा
कोरबा। अनुविभाग कोरबा में पटवारियों का लगातार तबादला किया जा रहा है, जबकि कोरोना काल में तबादलों से बचने का आदेश शासन ने से रखा है। यहां समन्वय के तौर पर इक्का दुक्का तबादले के अलावा समूह में भी स्थानांतरण की सूची भी निकाली जा रही है। अनुविभाग में पटवारियों के तबादले का अधिकार एसडीएम को होता है,, जो तहसीलदारों की अनुशंसा पर उनकी सूची तैयार करता है।
वर्तमान में शासन का सबसे महत्वपूर्ण कार्य गिरदावरी का चल रहा है। गिरदावरी का तात्पर्य है कि किस किस खसरा नम्बर में धान अथवा कौन कौन सा फसल लगा है,इसे तैयार करना। इसके अलावा दावा आपत्ति के निराकरण की आखिरी तारीख 15 अक्टूबर है, ऐसी स्थिति में प्रशासनिक कसावट के बहाने पटवारियों का तबादला किए जाने का क्या औचित्य? इससे शासन का कार्य तो प्रभावित तो होगा ही, साथ में गिरदावरी की शुद्धता भी प्रभावित होगी।
ऐसा प्रतीत होता है कि कतिपय भ्रष्ट पटवारियों को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाने के लिए ट्रांसफर की सूची तैयार कर ली गई। इसमें सीधे सादे पटवारियों को भी नाप दिया जाता है। इन्हें मानसिक रूप से परेशान करना अधिकारियों की चाल नजर आ रही है। उदाहरण के तौर पर कोरबा अनुविभाग में आशुतोष कुमार नाम के पटवारी का एक साल में 3 बार तबादला किया गया। इसी तरह चैतन्या राठौर, आरती प्रसाद और फिरोज आलम का भी बार बार तबादला किया जा रहा है। वहीं रेशम साहू जैसे पूर्व में निलंबित भ्रष्ट पटवारी को मलाई वाले जगह पर पदस्थ किया गया है। रिकार्ड दुरुस्ती भी शासन की प्रमुख प्राथमिकता है जब कोई पटवारी एक स्थान से दूसरे स्थान में जाएगा, रिकार्ड चेक करेगा पूरा रिकार्ड मिलाएगा उसमे शासन, पब्लिक के साथ साथ काम करना है उसमें समय लगेगा रिकार्ड शुद्धता जैसा कार्य भी प्रभावित होता है।