कोरबा। क्या हम शारीरिक दूरी भूल गए हैं। ठीक एक साल पहले मार्च माह में देश भर में लाकडाउन लगा था। शहर व सप्ताहिक बाजारों में जिस निश्चिंता से लोग भीड़ का हिस्सा बन रहे यह प्रशासन के लिए चिंता का विषय है। इक्के- दुक्के लोगों के चेहरे पर ही मास्क नजर आ रहा। इस ढीलाई की वजह से कोरोना की वापसी की आहट फिर से सुनाई देने लगी है। बीते सप्ताह तक प्रतिदिन औसतन आठ से 11 संक्रमित मिल रहे थे ,वह बढक़र 13 हो गई है। दो सप्ताह के भीतर 123 संक्रतिम मरीज मिल चुके हैं। सार्वजनिक स्थानों में शारीरिक दूरी बनाए रखने के निमय की खुले आम अवहेलना हो रही है। कोविड नियम में पालन कराने की कसावट अब बीते दिनों की बात हो गई है। कुछ दिन पहले आम लोगों को ऐसा लग रहा था जैसे कोरोना अब वापस हो गई है। इस भूल के बीच में शारीरिक दूरी, हाथ धुलाई, मास्क पहनने की अनिवार्यता को जैसे अनावश्यक समझा जाने लगा। कोरोना के बढ़ते ग्राफ ने आम लोगों के लापरवाही की पोल खोल दी है। शहर के बाजार, स्कूल, अस्पताल बस, सिनेमाघर, सरकारी और निजी सहित अन्य संस्थानों कोविड नियम के जिन शर्तो पर खोलने की अनुमति दी गई। वह अब कहीं भी दिखाई नहीं दे रही। संस्थान प्रमुख ही नहीं आम लोग भी इसके अनिवार्यता को नजर अंदाज करने लगे हैं। कमोबेश इन नियमों को पालन कराने में अब प्रशासन की भी रुचि नही रही। नियमों की अवहेलना से पहले की तरह हालात बन जाए तो कोई बड़ी बात नही।