हसौद। नर्सिंग होम एक्ट के उल्लंघन, बिना अनुमति क्लिनिक चलाने के कारण जिस क्लीनिक को पहले भी 4 बार स्वास्थ्य विभाग ने सील किया, उस क्लिनिक का सील तोड़कर तथाकथित बंगाली डॉक्टर सुब्रतो दास लोगों का इलाज नियमित रूप से कर रहा था। मंगलवार को नरियरा की एक महिला की बॉटल चढ़ाने के दौरान मौत हो गई। परिजन ने गलत इलाज का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। सूचना पर नायब तहसीलदार व टीआई पहुंचे और क्लिनिक को फिर से सील कर दिया है। जिले में नर्सिंग होम एक्ट का पालन कराने के लिए जिस विभाग के जिम्मेदार पदाधिकारियों की जिम्मेदारी दी है, वे उसमें कैसे लापरवाही बरत रहे हैं, इसका बड़ा उदाहरण सामने आया है। ग्राम हसौद में तथाकथित बंगाली डॉक्टर सुब्रतो दास बंगाली क्लिनिक का संचालन करता है। संचालक ने नर्सिंग होम एक्ट के तहत क्लीनिक संचालन करने की अनुमति भी नहीं ली है। इसके बावजूद उसमें इलाज किया जा रहा है। शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहले भी चार चार बार उस क्लीनिक को सील कर चुका है, लेकिन सुब्रतो दास सीलिंग को तोड़कर फिर से अपनी दुकानदारी शुरू कर दी थी, लेकिन स्वास्थ्य विभाग वालों ने कोई कार्रवाई ही नहीं की। मंगलवार को नरियरा की महिला रहीम बाई (65 वर्ष) पति घसिया राम साहू को बीमार होने पर उसके परिजन इसी डॉक्टर के पास लेकर गए थे। तथाकथित डॉक्टर द्वारा उसका इलाज करते हुए बॉटल चढ़ाई गई। इसी दौरान महिला की तबीयत बिगड़ी और उसकी मौत हो गई। विभाग को पता चला तो मौके पर पहुंची।
महिला की मौत के बाद महिला के आक्रोशित परिजन ने गलत इलाज करने का आरोप लगाते हुए क्लिनिक में हंगामा किया। इसके बाद चक्काजाम करने की कोशिश की जाने लगी। अधिकारी नायब तहसीलदार केके पाटनवार, टीआई एमएम मिंज को सूचना मिलने पर दोनों अपने टीम के साथ पहुंचे। परिजन को समझाइश देकर शांत कराया। स्वास्थ्य विभाग अवैध क्लीनिक को चार बार सील कर चुकी है और संचालक हर बार सीलिंग तोड़ देता है। इसके बाद भी विभाग द्वारा एक बार भी उसके खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने का मामला दर्ज नहीं किया गया। इससे उनकी कार्रवाई करने पर भी लोगों को संदेह है। नायब तहसीलदार केके पाटनवार ने बताया कि क्लीनिक संचालक मौके से फरार हो गया, लेकिन उसके क्लीनिक को सील कर दिया है, क्योंकि सील नहीं करने पर वहां रखी दवाइयों को इधर उधर कर सकता था।