जांजगीर-चांपा। किशोरी बालिकाओं को शिक्षा की मुख्यधारा में जोडऩे के साथ ही रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण के लिए सहेली शाला की शुरुआत की गई थी। किशोरी बालिकाओं को सिलाई-कढ़ाई के साथ कंप्यूटर प्रशिक्षण के लिए जिले के सैकड़ों स्कूल परिसर में अतिरिक्त भवन का निर्माण करवाया गया। इधर, मिशन का शिक्षा विभाग में संविलियन होने के बाद फंड आना बंद हो गया। लिहाजा, केंद्रों में ताला लगने से भवन खंडहर में तब्दील हो रहे हैं।
सहेली शाला भवन निर्माण के बाद प्रशिक्षण योजना के तहत सामग्री वितरित किया गया। प्रत्येक केंद्रों में तीन सेट कंप्यूटर व चार से पांच सिलाई मशीन आवंटित किया गया था। शासन से प्रति वर्ष प्रशिक्षण देने वाले समूहों के लिए राशि जारी की जाती थी। फंड आवंटन की स्वीकृति बंद होते ही सहेली शालाओं में ताला लग गया है। शालाओं की सामग्रियों को कहां रखा गया है, इसके बारे में विभागीय अधिकारी भी सुध नहीं ले रहे हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारी का कहना है कि सहेली शाला की शुरुआत छात्राओं को शिक्षा की मुख्यधारा में जोडऩे के लिए की गई थी। लगभग सभी ग्राम पंचायतों में बालिकाएं शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़ गई हैं। उनका यह भी कहना है कि प्रशिक्षण केंद्र के सभी सामग्री की जानकारी है। यदि सामग्री उपलब्ध है, तो उसकी उपयोगिता नहीं हो पाना बेमानी साबित हो रहा है। कुछ स्कूलों में सहेली शालाओं को अतिरिक्त कक्ष के रूप में उपयोग किया जा रहा है, जहां पहले से अतिरिक्त कक्ष उपलब्ध है, वह उपयोगहीन साबित होने से खंडहर में तब्दील हो रहे हैं।
शाला त्यागी बालिकाओं में इजाफा
शिक्षा विभाग द्वारा भले ही शाला त्यागी बालिकाएं नहीं होने का दावा किया जा रहा है, किंतु जिले में ऐसे कई ग्रामीण क्षेत्र हैं, जहां हाईस्कूल के बाद हायर सेकेंडरी की सुविधा नहीं है। ऐसे में आगे की पढ़ाई बालिकाओं के लिए बाधा बनी हुई है। जिले के ग्रामीण इलाकों में बालिकाएं दसवीं तक पढ़ाई कर शाला त्यागी की श्रेणी में आ गई हैं।
सामानों का निजी उपयोग
प्रशिक्षण के लिए आवंटित कंप्यूटर सेट कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। कुछ स्थानों में प्रशिक्षण के सामानों को स्कूलों की बजाय शिक्षक निजी उपयोग कर रहे हैं। इसी तरह सिलाई मशीन को भी घरेलू उपयोग में लाया जा रहा है। शिक्षा विभाग में विभिन्न समस्याओं के निराकरण के लिए खनिज मद से मांग की जा रही है। सहेली शालाओं को प्रशिक्षण संस्थान के तौर पर संचालित करने की कवायद की जा सकती है, किंतु अब तक पहल नहीं की गई है।