जांजगीर-चांपा। कोरोना से निपटने में जुटे मैदानी अमले के कई कर्मी नवरात्र पर व्रत रखे हुए हैं। इसमें मितानिन व अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी शामिल हैं। ऐसे में विभाग को यह चिंता सता रही है कि काम करने के दौरान ये खाली पेट रहे तो ज्यादा संवेदनशील होंगे। ऐसे में अफसरों ने अपील की है कि वे काम के दौरान खाली पेट न रहें।
नवरात्र पर्व शुरू होते ही लोग माता की भक्ति में डूबे हुए हैं। इस पर्व के दौरान व्रत रखने की प्रथा है। खासतौर से महिलाएं बड़ी संख्या में व्रत रखती हैं। मितानिन के रूप में कार्यरत स्वास्थ्य विभाग की संविदा महिला कर्मियों के साथ मैदानी क्षेत्र में काम करने वाले कई महिला व पुरुष स्वास्थ्य कार्यकर्ता भी व्रत रखे हुए हैं। जबकि उनमें से अधिकांश की ड्यूटी कोरोना निपटान में लगाया गया है। वहीं कोरोना से बचने के लिए रोगप्रतिरोधक क्षमता को ठीक रखना जरूरी है। खासकर यदि कोई खाली पेट रहता है तो उसके संक्रमित होने की आशंका अन्य की अपेक्षा ज्यादा रहती है। इस तथ्य ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की चिंता बढ़ाकर रख दी है, क्योंकि व्रत रखने वाले भी कोरोना निपटान में लगे हुए हैं। ऐसे में यदि वे खाली पेट रहते हैं तो इसके गंभीर परिणाम सामने आ सकते हैं। इसे देखते हुए व्रत रखने वाले कर्मचारियों को कहा गया है कि वे ड्यूटी के दौरान खाली पेट न रहें, बीच-बीच पानी के साथ अन्य तरल पदार्थ और फलाहार का सेवन करें। ऐसा करने से शरीर में कमजोरी नहीं आएगी और वे काम के दौरान वायरस से अपना बचाव कर सकेंगे। गाइडलाइन में भी साफ है कि खाली पेट रहने से संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
लगातार मिल रही छुट्टियों की अर्जी
कर्मचारी व अधिकारी लंबे समय से काम कर रहे हैं। एक ही प्रकार का काम कर थक व उब चुके हैं। वहीं अब त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ छोटे कर्मचारियों से लेकर बड़े अधिकारी तक छुट्टी की अर्जी लगा रहे हैं। ऐसे में अधिकारियों को एक नई तरह की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। क्योंकि छुट्टी की अर्जी को खारिज भी नहीं कर सकते हैं, क्योंकि ये लंबे समय से काम कर रहे हैं।