
कोरिया बैकुंठपुर। श्री गणेश जी का विसर्जन श्री अनंत चतुर्दशी के दिन बेहद धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। ढोल-नगाड़ों की धुन पर भक्तों ने रंग-गुलाल उड़ाकर गणपति बप्पा को विदाई दी। इस दौरान पूरे जिले में उत्सव का माहौल रहा। जगह-जगह शोभायात्राएँ निकाली गईं, जिनमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। गणेश भक्तों के उत्साह और श्रद्धा ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से गणेशोत्सव की शुरुआत होती है. भगवान गणेश की उपासना चतुर्दशी तिथि तक होती है. श्री गणेश प्रतिमा की स्थापना चतुर्थी तिथि को की जाती है और विसर्जन चतुर्दशी तिथि को किया जाता है. ये नौ दिन गणेश नवरात्रि कहे जाते हैं. मान्यता है कि प्रतिमा का विसर्जन करने से भगवान पुन: कैलाश पर्वत पर पहुंच जाते हैं. स्थापना से ज्यादा विसर्जन की महिमा होती है. इस दिन अनंत शुभ फल प्राप्त किए जा सकते हैं. इसलिए इस दिन को अनंत चतुर्दशी भी कहते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीवेद व्यास ने गणेश चतुर्थी से श्रीगणेश को महाभारत कथा लगातार दस दिन तक सुनाई थी. दस दिन बाद जब वेद व्यास जी ने आंखें खोलीं तो पाया कि दस दिन की मेहनत के बाद गणेश जी का तापमान बहुत बढ़ गया है. ऐसे में वेद व्यास जी ने तुरंत गणेश जी को निकट के सरोवर में ले जाकर ठंडे पानी से स्नान कराया था. कहते हैं कि इसीलिए गणेश स्थापना कर चतुर्दशी को उनको शीतल किया जाता है।




















