जांजगीर-चाम्पा। तत्कालीन थाना प्रभारी के साथ ड्यूटी के दौरान गाली गलौज कर चक्काजाम करने वाले दो साल से फरार आरोपी गांव में होने के बावजूद पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। पुलिस द्वारा कार्रवाई के नाम पर सभी आरोपियों को फरार दर्शाकर फाइल ठण्डे बस्ते में डाल दी गई है। इससे पुलिस की सतर्कता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
जिले में पुलिस निष्क्रियता के चलते लगातार अपराधों के आंकड़े बढऩे लगे हैं। जिले में अपराधी बेखौफ वारदात कर घूम रहे हैं, जबकि थानों में दर्ज अपराधों की फाइलों में संबंधित आरोपियों को फरार दर्शाकर कार्रवाई की औपचारिकता निभा दी जाती है। न्यायालय द्वारा मामले को संज्ञान में लेने के बाद भी आरोपियों की धरपकड़ की जाती है। इससे पुलिस की सक्रियता का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जानकारी के अनुसार तत्कालीन एसपी श्रीमती नीतु कमल के कार्यकाल के दौरान वर्ष 2018 के जुलाई माह के अंतिम सप्ताह में पामगढ़ थाना में कुमार सिंह उसेंडी को प्रभारी सौंपा गया। ड्यूटी के दौरान 6 अगस्त 2018 की शाम नवपदस्थ थाना प्रभारी अपनी टीम के साथ पेट्रोलिंग पर निकले। इसी दौरान जांजगीर मोड़ के पास पंकज ताण्डे, शशि ताण्डे, निखिल दिव्य, देवेश कौशिक, निखिल रात्रे, रितिज तिवारी, कमले व 6-7 अन्य लोगों का थाना प्रभारी का विवाद हो गया। विवाद के चलते सभी युवकों ने बिलासपुर-शिवरीनारायण मार्ग पर चक्काजाम कर दिया। घटना के बाद थाना प्रभारी की रिपोर्ट पर आरोपी पंकज ताण्डे, शशि ताण्डे सहित आधा दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ भादवि की धारा 147, 186, 294, 321, 353, 506 के तहत जुर्म दर्ज किया। घटना के कुछ माह बाद थाना प्रभारी उसेंडी का स्थानांतरण अन्य थाना हो गया। इस दौरान आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। वहीं विगत दो साल से आरोपी गांव में घूम रहे हैं, जबकि पुलिस द्वारा फाइलों में आरोपियों को फरार दर्शाकर औपचारिकता निभा दी गई। यहां पुलिस की उदासीनता के चलते आरोपी बेखौफ गांव में घूम रहे हैं।