
कोरिया बैकुंठपुर। मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में चल रहे कार्यों में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है। रोजगार सहायक परिवार, रिश्तेदारों के नाम पर फर्जी हाजिरी भरकर राशि निकाल रहे हैं। ऐसे कई मामलों की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन, मनरेगा कार्यालय व लोकपाल तक पहुंच रही है। बावजूद इसके जांच आगे नहीं बढ़ पा रही है। मालूम चला है कि मनरेगा के कार्यों में सही निरीक्षण और मूल्यांकन नहीं होने से रोजगार सहायक विभागीय अफसरों के साथ मिलकर बड़ी गड़बड़ी कर रहे हैं। कई जगहों पर फर्जी तरीके से मस्टररोल, फाल्स हाजिरी भर रहे के साथ मनरेगा के कार्यों को ठेके के रूप में बांट दिया जा रहा है, जिसे छोटे ठेकेदारों ने अपनी कमाई का बड़ा जरिया बना लिया है। ठेके में बंट चुके मनरेगा में अब ठेकेदार, रोजगार सहायक अपने परिवार व रिश्तेदारों के नाम से व्यक्तिगत जॉब बनवाकर राशि निकाल रहे हैं। वहीं मनरेगा के कार्यों मजूदरों व मशीनों ने करवाकर जैसे तैसे पूरा करवा रहे हैं। ऐसी ही एक मामले की शिकायत कलेक्टर जनदर्शन में हुई है। ग्राम पंचायत भंडारपारा के शिकायतकर्ता संदीप तिर्की पिता जीतन तिर्की का आरोप है कि मनरेगा अंतर्गत स्वीकृत कार्यों में रोजगार सहायक के द्वारा अपने माता, पिता, भाई, उपसरपंच भाभी व अन्य रिश्तेदारों के नाम पर व्यक्तिगत जॉब कार्ड बनाकर फर्जी हाजिरी भरकर राशि निकाली गई है। ग्राम पंचायत भंडारपारा में मनरेगा के तहत चल रहे कार्यों में ऐसे नामों को भी शामिल किया गया है जो कि गांव के मूलनिवासी नहीं है। मध्यप्रदेश और बैकुंठपुर नगर पालिका क्षेत्र के रहने वालों के नाम पर भी फर्जी जॉब कार्ड बनवाया गया है। हैरानी की बात तो यह है कि रोजगार सहायक के द्वारा परिवार के सदस्यों के नाम पर 100 दिन पूरा होने के बाद जनपद से जॉब कार्ड को डिलीट करवाकर दूसरा जॉब कार्ड बनवाया गया है, जबकि साल में दो जॉब कार्ड नहीं बनाया जा सकता है। मनरेगा से जुड़े ऐसे कई शिकायतों में बताया गया है कि ग्राम पंचायत शंकरपुर, ग्राम पंचायत भंडारपारा, ग्राम पंचायत सलबा, ग्राम पंचायत अमरपुर में मनरेगा के कार्यों में फर्जीवाड़ा चल रहा है। भंडारपारा में 50-60 व्यक्तियों के नाम पर मस्टर रोल निकाला गया है, जबकि 10 से 15 श्रमिक ही काम पर रहते हैं। मामले में विभागीय जांच हो तो कई बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं। कलेक्टर जनदर्शन में हुई शिकायत में बताया गया है कि रोजगार सहायक लीलावती के पिता रामप्रसाद, भाई मोतीलाल, मां द्रौपदी, भाभी शशिप्रभा उपसरपंच के नाम पर जॉब कार्ड बना हुआ है। इसमें परिवार के प्रत्येक सदस्यों के नाम पर जॉबकार्ड है जबकि नियमानुसार परिवार में किसी एक व्यक्ति के नाम पर जॉब कार्ड बनाया जाता है। यही हाल आसपास के अन्य पंचायतों में भी रोजगार सहायकों द्वारा किया जा रहा है।





















