जांजगीर-चाम्पा। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना अंतर्गत बनाये जा रहे चोरभट्टी – पकरिया मार्ग के निर्माण में गुणवत्ता क ी पूरी तरह से अंदेखी की जा रही हैं जहां ठेकेदार द्वारा चपटा एवं कुरकु रे पत्थर का इस्तेमाल किया जा रहा हैं, वहीं सडक़ चौड़ाई में भी धांधली किया जा रहा हैं। जिससे सडक़ टिकाऊ पर सवालियां निशान लगने लगा हैं।
ज्ञात हो कि लगभग ७-८ वर्ष पूर्व चोरभट्टी-पकरिया सडक़ का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के अंतर्गत कराया गया था। यह सडक़ अब पूरी तरह से उखड़ जाने के कारण इस सडक़ का फिर से निर्माण किया जा रहा हैं। सरकारी योजना के अनुसार इस सडक़ के दोनों तरफ खोदाई कर इसमे गिट्टी डालकर और चौड़ा किया जाना हैं। लेकिन इस कार्य में सडक़ के किनारे-किनारे चौड़ाई कार्य में चपटे एवं कुरकुरे गिट्टी को डालकर सडक़ निर्माण की महज औपचारिकता पूरी की जा रही हैं। वैसे तो इस सडक़ का निर्माण अब तक हो जाना चाहिए था। लेकिन ठेकेदार की मनमानी के कारण यह सडक़ निर्माण अधूरा पड़ा हुआ हैं। जिस तरह से गुणवत्ता विहिन निर्माण कार्य किया जा रहा हैं, इससे अच्छा यहीं होता कि इस सडक़ का निर्माण कराया ही नहीं जाता। ग्राम चोरभट्टी से पकरिया तक लगभग ७-८ किलो मीटर लंबाई की इस सडक़ में कई जगह ह्यूम पाईप डालकर पुलिया निर्माण किये जाने की आवश्यकता हैं। लेकिन विभागीय अधिकारियों द्वारा बिना सर्वे किये ही इस सडक़ का निर्माण कराया जा रहा हैं। सच कहा जाये तो सडक़ निर्माण में जिस कदर से घटिया गिट्टी से निर्माण किया जा रहा हैं इससे यह सडक़ दो माह भी टीक पायेगी यह कहना भी मुश्किल होगा। प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ विभाग द्वारा बनाये जा रहे इस सडक़ निर्माण में ठेकेदार एवं अधिकारियों की पूरी तरह से मिली भगत परिलच्छित होने लगी हैं। जिस कारण से ठेकेदार के ऊपर अधिकारी वर्ग दबाव नहीं बना पा रहें हैं। चोरभट्टी-पकरिया मार्ग में पकरिया एवं खपरी के बीच दो तीन स्थानों में ह्यूम पाईप लगाया जाना था। इसी तरह ग्राम खपरी एवं टंाड़पारा के बीच दो स्थानों में तथा टंाड़पारा एवं चोरभट्टी के बीच तीन-चार जगहों में ह्यूम पाईप लगाकर पुलिया निर्माण किया जाना। जरूरी था, लेकिन इस सडक़ निर्माण में इन महत्वपूर्ण आवश्कताओं को अंदेखी करतें हुए विभागीय अमला एवं ठेकेदार द्वारा केवल सडक़ निर्माण की औपचारिकता पूरी की जा रही हैं।
बल्कि यह कहा जा सकता हैं कि जितनी बड़ी राशि इस सडक़ निर्माण के लिए स्वीकृ त की गई हैं। उससे आधी बजट में ही इस सडक़ निर्माण को पूरा कर शासन को चूना लगााने का काम किया जा रहा हैं, जिससे इसकी गुणवत्ता पर सवालियां निशान लगने लगा हैं। बल्कि शासन को चाहिए कि इस अनोखे, अदभुत तथा गुणवत्ता विहिन सडक़ निर्माण का उच्चस्तरीय जांच करानी चाहिए ताकि हकीकत सामने आ सके।