जांजगीर-चांपा। कोरोना के काल के चलते पूरा देश आर्थिक संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर जिले में जिला प्रशासन सहित अन्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारी मालामाल हो रहे हैं। एक बार फिर यहां आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित छात्रावासों में बिलासपुर के एक फर्म से 90 रेफ्रिजरेटरों की खरीदी कर ली गई। विभाग द्वारा डीएमएफ मद का दुरूपयोग कर लाखों रूपये की लागत से बंद छात्रावासों में बाजार से डेढ़ गुना अधिक कीमतों पर रेफ्रिजरेटरों की खरीदी कर ली गई। वहीं दूसरी ओर ठेकेदार द्वारा लगभग 20 से 25 हजार रूपये कीमत की रेफ्रिजरेटरों को 32 हजार 990 रूपये में 90 छात्रावासों में भेजा गया है।
जिले में खनिज से प्राप्त राजस्व का उपयोग क्षेत्र के विकास व मूलभूत सुविधाओं के लिए किया जाना है। जिसके लिए राज्य शासन के निर्देश पर समिति का गठन किया गया है, ताकि क्षेत्र की समस्याओं की जानकारी लेकर इस मद की राशि का उपयोग कर जिलेवासियों को लाभान्वित किया जा सके, मगर जिले में जिला खनिज न्यास मद की राशि का बंदरबांट किया गया है। यहां चहेते ठेकेदार को लाभान्वित करने व मोटी कमीशन राशि के उद्देश्य को लेकर डीएमएफ से मनमाने ढंग से रेफ्रिजरेटरों की खरीदी कर बिल पेश कर रूपए आहरण किया गया है। जानकारी के अनुसार जिला के आदिवासी विकास विभाग अंतर्गत शासकीय छात्रावासों में जिला खनिज न्यास मद से रेफ्रिजरेटरों की खरीदी की गई है। कोरोना काल के दौरान जहां संक्रमण की रोकथाम के लिए केंद्र व राज्य सरकार द्वारा डीएमएफ मद कर उपयोग कर लोगों से संक्रमण से बचाने के लिए रूपयों का उपयोग करने का निर्देश दिया, मगर जिले में जिम्मेदार लोगों की चिंता छोड़ भ्रष्टचार में संलिप्त रहे। इस दौरान आदिवासी विकास विभाग द्वारा संचालित बंद छात्रावासों में डीएमएफ मद की राशि से बाजार से डेढ़ गुनी कीमतों पर रेफ्रिजरेटरों की खरीदी कर ली। इनसें से लगभग आधे रेफ्रिजेरटर बिना उपयोग के ही खराब होने लगे हैं। यदि यही रकम संक्रमण की रोकथाम के लिए खर्च की जाती तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। जानकारी के अनुसार आदिवासी विकास विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2020-21 में खनिज न्यास मद से 90 कन्या व बालक छात्रवासों के लिए 260 लीटर क्षमता वाली एलजी कंपनी की 90 रेफ्रिजरेटरों की खरीदी 32 हजार 990 रूपए के दर से की गई है, मगर ये लगभग 30 लाख रूपए के फ्रीज अनुपयोगी पड़े हैं, क्योंकि पिछले डेढ़ सालों से छात्रावास ही बंद है। साथ ही शासन द्वारा छात्रावास में फ्रीज खरीदने का कोई प्रावधान नहीं है। यहां बच्चों को ताजा भोजन दिया जाना है। कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय खनिज न्यास का गठन किया जाता है। यहां कमेटी के सुझाव के बाद ही काम के लिए फंड का उपयोग किया जाता है मगर जिले में डीएमएफ से रेफ्रिजरेटरों की खरीदी के मामले में नियमों को ताक पर रखकर केवल कार्यालय से आए प्रस्ताव को देखकर रेफ्रिजरेटरों की खरीदी की मंजूरी तत्कालीन कलेक्टर के कार्यकाल दे दी गई। इसके लिए न तो निविदा जारी की और न ही विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। विभाग द्वारा केवल जेम पोर्टल का हवाला देकर चेहते फर्म को वर्कआर्डर जारी कर छात्रावासों में रेफ्रिजरेटरों की सप्लाई करा दी गई। चेहतों को लाभान्वित करने के लिए इन दिनों जिम्मेदार अधिकारी इतने मशगूल हैं कि उन्हें अब न तो कार्रवाई का डर है और न ही लोगों की परवाह। पहले तो सरकारी विभागों में भ्रष्टचार ही होता था लेकिन अब ये चहेतों को काम देने के लिए फर्जी ढंग से अखबार भी छापने लगे। हाल ही में समाचार पत्रों में बिना निविदा के एक अखबार की प्रति में छेड़छाड़ कर उसमें निविदा छाप दिया गया, जबकि जनसंपर्क विभाग से यह निविदा प्रकाशित ही नहीं की गई और उसमें विभाग का फर्जी कोड डाल कर 30 लाख रूपए का टेंडर खोलकर कार्यआदेश जारी कर संबंधित को भुगतान भी कर दिया गया। हालांकि मामले का खुलासा होने के बाद अधिकारियों में हड़कंप है और इसको लेकर शुक्रवार को कचहरी चौक पर प्रदर्शन भी करेंगे।
छात्रावासों के लिए खरीदे गए कई रेफ्रिजरेटर छात्रावास के बजाए अधीक्षकों के घरों की शोभा बढ़ा रहे हैं। छात्रावास अभी बंद है। इसलिए इसे देखने वाला भी कोई नहीं अगर इसका भौतिक सत्यापन कराए जाए तो वास्तविकता सामने आएगी। वहीं यह भी पता चलेगा कि बाजार में इसकी वास्तविक कीमत कितनी है।
छात्रावासों के लिए जेम पोर्टल के माध्यम से रेफ्रिजरेटरों की खरीदी की गई है। फ्रर्म को वर्कआर्डर नियमों के तहत जारी किया गया है। रेफ्रिजरेटरों के खराब होने की शिकायत नहीं मिली है।
पीसी लहरे
सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास विभाग