अबू धाबी, १६ जुलाई [एजेंसी]।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाह्यान ने शनिवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन के असर को कम करने और अनुकूलन के लिए विकसित देशों को 100 अरब अमेरिकी डालर प्रदान करने की प्रतिबद्धता को जल्द पूरा करना चाहिए। दोनों नेताओं ने जलवायु महत्वाकांक्षा, कार्बन उत्सर्जन कम करने, स्वच्छ ऊर्जा पर सहयोग का विस्तार करने तथा काप-28 सम्मेलन से ठोस और सार्थक परिणाम प्राप्त करने के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता जताई। साथ ही कहा कि भारत की जी-20 अध्यक्षता जलवायु परिवर्तन से निपटने में सहयोग को तेज करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदानों में भागीदारी-एकजुटता तथा समर्थन के जरिए पेरिस समझौते के दीर्घकालिक लक्ष्यों को पूरा करने के प्रयासों में तेजी लाने का आह्वान किया। दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत के बाद जलवायु परिवर्तन पर एक संयुक्त ब्यान जारी कर भारत और यूएई ने पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सामूहिक कार्रवाई के महत्व को रेखांकित किया। मोदी ने 2023 में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन यानी काप-28 का मेजबान देश चुने जाने पर यूएई को बधाई दी और जलवायु सम्मेलन की आगामी अध्यक्षता के लिए उसे अपना पूरा समर्थन देने का वादा किया।
दोनों नेताओं ने ग्लोबल स्टाकटेक के महत्व और काप-28 में इसके सफल निष्कर्ष पर पहुंचने के संबंध में प्रकाश डाला। ग्लोबल स्टाकटेक का आशय सम्मेलनों के उद्देश्यों और पेरिस समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने के संबंध में वैश्विक सामूहिक कार्रवाई का जायजा लेने की कवायद से है। उन्होंने कॉप-28 में ग्लोबल स्टाकटेक के लिए एक संतुलित दृष्टिकोण को लागू करने के महत्व पर जोर दिया और राष्ट्रों से अपनी राष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं को मजबूत करने के लिए ग्लोबल स्टाकटेक के परिणामों का उपयोग करने का आह्वान किया। इसमें विकासशील देशों के लिए अधिक वित्त और सहयोग जुटाना भी शामिल है।उन्होंने संधि और पेरिस समझौते के प्रविधानों के अनुसार जलवायु परिवर्तन के प्रतिकूल प्रभावों का प्रभावी ढंग से मुकाबला करने के लिए विकासशील देशों का समर्थन करने में अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
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