अधिकारी के भ्रष्ट आचरण से कांग्रेस का सफाया हुआ तय
मुख्यमंत्री के ड्रीम परियोजना का जिले मे बुरा हाल
सीताराम नायक

जांजगीर-चाम्पा। जिले मे स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण तथा मनरेगा,ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत जिला पंचायत द्वारा ग्राम विकास के लिए आबंटित 7 करोड़ की राशि मे से भुगतान ताबड़तोड़ कर दिया गया है जहां नये कलेक्टर को इसकी खबर न लगे इस लिए सरपंचों व सचिवों के ऊपर दबाव बनाकर उनसे लगातार चेक कटवाया जा रहा है जबकि कई ग्राम पंचायतों मे उक्त कार्यो का पता ही नही है और संबंधित ठेकेदार को राशि का भुगतान करने मे जरा भी देर नही किया गया। ज्ञात हो कि स्वच्छ भारत मिशन एवं मनरेगा के तहत जांजगीर चाम्पा जिले के 123 ग्राम पंचायतों मे पानी सोख्ता, कचरा घर, बस स्टेण्ड सेड तथा गीला कचरा व सुखा कचरा के लिए स्ट्रक्चर तथा गांव के छोटे नालो मे स्टापडेम का निर्माण किया जाना था। यह सब काम नरवा,गरवा,घुरवा ,बाड़ी प्रोजक्ट के तहत किया जाना है जिसे ग्रामीण विकास परियोजना तथा ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत बनाया जा रहा है । लेकिन जांजगीर चाम्पा जिले मे जिस तरह से इस योजना का दुरूपयोग किया जा रहा है शायद ही प्रदेश के किसी और जिले मे होता होगा। जिला पंचायत के मुख्यकार्यपालन अधिकारी द्वारा अपने चहेते ठेकेदार को खुलकर लाभ दिलाने के लिए सरपंच सचिवों पर दबाव बनाया जा रहा है और कई गावों मे काम हुआ तक नही है जबकि इन कामों को ग्राम पंचायतों को दिया जाना चाहिए था लेकिन संबंधित ठेकेदार को लाभ दिलाने के लिए नियम से हटकर कार्य संबंधित अधिकारी द्वारा किया जा रहा है । सच कहा जाय तो इस कार्य के निर्माण मे गुणवत्ता का जरा भी ख्याल नही रखा जा रहा है। जो निर्माण के साथ ही टूटने लगा है।

सबसे ध्यान देने वाली बात यह है कि यह काम जिस ठेकेदार को मिला है उसे किसी बड़े कांंग्रेस नेता का करीबी बनाया जा रहा है लेकिन सच्चाई यह है कि उक्त ठेके दार को कभी भी कांग्रेस के कार्यक्रमों मे देखा ही नही गया है जो स्थानीय कांग्रेस नेता का गरीबी बनते फिर रहा है और राजनैतिक धौंस झाडक़र सरपंच,सचिवों पर दबाव बना रहे है। 123 ग्राम पंचायतों का काम एक ही ठेकेदार को देना किसी सोंची समझी साजिश ही लगता है जिसके कारण उक्त कामो को दिया गया है। जरूर इसके एवज मे जिला पंचायत के अधिकारी कोई अच्छा लाभ ले रहे है ऐसा प्रतीत होता है। लोग पहले मान रहे थे कि नरवा,गरवा,घुरवा ,बाड़ी प्रोजक्ट से गांव की तस्वीर बदलेगी परन्तु जिस तरह के काम ठेकेदार लालचंद देवांगन द्वारा कराया जा रहा है यह किसी औपचारिकता से कम नही है यह काम अधिक दिन तक टिकाउ नहीं लगता।

सबसे दुखद बात यह है कि जिन सब इंजीनियरों तथा एसडीओं को इन कार्यो का मुल्यांकन व सत्यापन का दायित्व दिया गया है वे भी पूरी तरह से बिकाउ हो गये है जो बड़े अधिकारी के रूचि के कारण गलत कामों का भी सही मुल्यांंकन कर रहे है इससे राज्य सरकार की किरकिरी होने लगी है । उक्त कामों को देखकर लोग यही कहने लगे है कि इससे अच्छा यही होता कि इन कामों को कराया ही नही जाता। संबंधित ठेकेदार द्वारा पानी सोख्ता, कचरा घर, बस स्टेण्ड सेड तथा गीला कचरा व सुखा कचरा के लिए स्ट्रक्चर जो बनाया भी गया है उसमे पूरी तरह से मापदण्डों का पालन नही किया गया है जिसे देखकर यही कहा जा सकता है कि ये सब शासन को चूना लगाने की नियत से किया जा रहा है। इन कामों का किसी दूसरे ईमानदार ऐजेंसी से जांच कराया जाना आवश्यक है जिससे सच्चाई पर से पर्दा हट सके । और शासन को नुकशान पहुचाने वाले लोग जेल की हवा खा सके।