
जांजगीर । जिले में भले ही हर पांच किलोमीटर में प्राइमरी व मिडिल स्कूल खुल गए हैं लेकिन 50 फीसदी स्कूलों में अब भी बिजली की सुविधा नहीं है। जहां बिजली है वहां बारिश के दिनों में अंधेरे का आलम रहता है। ऐसे में छात्रों को रोशनी की दिक्कत होती है। कम रोशनी के चलते कई स्कूलों में बरामदे में क्लास लगाई जाती है, लेकिन जिन स्कूलों में बरामदा भी नहीं है वहां छात्रों की पढ़ाई तकलीफदेह रहता है। हाल ही में पत्रिका टीम ने बारिश के दिनों में कई गांव के स्कूलों में दौरा किया तो चिंताजनक समस्या देखने को मिले। देवरहा पीथमपुर के प्राइमरी स्कूल में बिजली तो है लेकिन हल्की बारिश होने यहां बिजली गुल हो जाती है। ऐसेे में बच्चों को अंधेरे में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है। जिससे छात्रों के आंखें में बल पड़ता है और बच्चों की आंख कमजोर होने का डर सताते रहता है। हालांकि स्कूल प्रबंधन बच्चों को बरामदे में बिठाकर पढ़ाई करते पाए गए लेकिन बरामदे में भी पर्याप्त जगह नहीं होने से उन्हें दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। सूत्रों का कहना है कि जिले में तकरीबन 600 से अधिक सरकारी स्कूल हैं। जिसमें 50 फीसदी स्कूलों में बिजली की समस्या है। कई स्कूलों में बिजली बिल को लेकर विवाद होने से लाइन कटी हुई है। तो वहीं कई स्कूलों में डायरेक्ट कनेक्शन के बदौलत स्कूल रोशन हो रहे हैं। स्कूल के फंड में पर्याप्त बजट नहीं होने से कई स्कूलों में भारी भरकम बिजली बिल पेंडिंग है। ऐसे में स्कूल प्रबंधन बिना बिजली के ही काम चला रहे हैं। स्कूलों में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि बच्चों को पढ़ाई में दिक्कतें न हो। जहां समस्या है वहां के प्रधान पाठकों को ध्यान देकर बिजली की समुचित व्यवस्था करनी चाहिए। – एचआर सोम, डीईओ





















