कोरबा। वनमंडल कोरबा में कुछ दिनों तक राहत के बाद हाथियों ने फिर दस्तक दे दी है, जिससे क्षेत्रवासी काफी दहशत में हैं। हाटी परिक्षेत्र से अचानक पहुंचे दो हाथियों ने कुदमुरा रेंज के जिल्गा-गीतकुंवारी में आते ही उत्पात मचाना शुरू कर दिया।
हाथियों ने बीती रात दो किसानों की बाड़ी में प्रवेश किया और वहां लगे सब्जी, भाजी के पौधों को तहस-नहस कर दिया। जिससे इन किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है। कुदमुरा रेंजर विष्णु मरावी ने बताया कि विभाग को हाथी के आगमन तथा जिल्गा में नुकसान पहुंचाए जाने की सूचना मिल गई है। जिस पर वन अमला मौके पर पहुंच गया है और ग्रामीणों को सतर्क करने के साथ ही नुकसानी का सर्वे भी शुरू कर दिया है। उधर वनमंडल कटघोरा में हाथियों का उत्पात फिलहाल थम गया है। हालांकि 45 हाथियों की मौजूदगी एतमानगर रेंज में बनी हुई है। पिछले पखवाड़े दल से अलग होकर एक लोनर हाथी बेकाबू हो गया था और इसमें केंदई रेंज में भारी उत्पात मचाते हुए तीन ग्रामीणों को मौत के घाट उतारने के साथ ही कई घरों व फसलों को क्षतिग्रस्त कर दिया था। ग्रामीण हाथियों की दहशत से परेशान थे। हाथी को काबू करने के लिए वन विभाग द्वारा काफी कोशिश की गई किंतु इसमें सफलता नहीं मिलने पर प्रशिक्षित हाथी कुमकी को बुलाना पड़ा था। तैमुर पिंगला अभ्यारण्य से महावत इन हाथियों को लेकर एतमानगर पहुंच गया है और हाथी को मड़ई क्षेत्र में रखकर लोनर की ट्रैकिंग की जा रही है किंतु अब तक इसका पता नहीं चल सका है।
हाथियों ही नहीं बल्कि अन्य जंगली जानवरों के उत्पात से कई तरह की चुनौतियां मौजूद हैं। आए दिन उनके हमले हो रहे हैं। इनमें लोगों की जान जा रही है, वे घायल हो रहे हैं। संपत्ति को नुकसान हो रहा है सो अलग। इन सबके बीच जानवरों के उत्पात को रोकने के लिए काम करने के दावे शून्य हैं।
जिले के कटघोरा और कोरबा वनमंडल में अलग-अलग समूह में हाथी डटे हुए हैं और लगातार हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहे हैं। इनके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में शुरू होने वाले शाख कर्तन और वनोपज संग्रहण जैसे कार्यों पर प्रभाव पड़ना तय माना जा रहा है। हाल में ही कटघोरा में कई वनमंडलों के स्तर पर शाख कर्तन के लिए समितियों को प्रशिक्षण दिया गया। इसमें तकनीकी दक्षता के अलावा बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी दी गई। इसे व्यवहारिक रूप से जरूर माना जा रहा है। लेकिन विभाग के अधिकारी चिंतित हैं कि जिस तरह हाथियों का उत्पात जारी है, उससे जंगली इलाके में शाख कर्तन करने वाले लोग जीवन पर मंडराने वाले संकट को लेकर आशंकित रहेंगे। उनकी यह मानसिकता सही भी है क्योंकि जिस रफ्तार से घटनाएं हो रही हैं, उससे न केवल लोग नाराज हैं बल्कि सरकारी कोष भी प्रभावित हो रहा है।