
जांजगीर-चांपा। देवउठनी एकादशी के साथ ही देवताओं का चातुर्मास समाप्त होगा। इसके साथ ही चार माह से बंद मांगलिक कार्यों की शुरूआत होगी। आज 23 नवंबर को घरों के आंगन में गन्ने का मंडप बनाकर तुलसी एवं शालिकराम का विवाह रचाया जाएगा। शादी-ब्याह, गृह प्रवेश, उपनयन संस्कार, नामकरण जैसे मांगलिक कार्य जो रुके हुए थे, वे चातुर्मास समाप्त होने पर फिर से शुरू हो जाएंगे। वैसे हर बार देवउठनी एकादशी के दिन से ही शादी का मुहूर्त शुरू हो जाता है। देवशयनी एकादशी के बाद से मांगलिक कार्यों पर विराम लगा है। कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी यानी 23 नवंबर को देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी। देवउठनी के दिन भगवान विष्णु और तलसी मैया के विवाह मांगलिक पूजा अर्चना की जाती है। देवउठनी एकादशी के दिन 23 नवंबर को गोधुली बेला में लग्न रहेंगे। इस दिन कोई भी शादी या अन्य कोई भी मांगलिक कार्य करने के लिए मुहूर्त देखने की जरूरत नहीं है। ज्ञात हो कि शहर में लगभग 10 से अधिक मैरिज गार्डन है, जो सभी विवाह तिथियों में बुक हो चुके हैं। शहर में 50 ऐसे परिवार है, जिनका कारोबार विवाह आयोजनों पर ही निर्भर है, बैंड, फुल, डेकोरेशन, लाइट, टेट, हलवाई का काम करने वाले परिवारों में अब खुशियां है। शहर में विवाह के शहनाईयां गूंजेगी तो इन परिवारों में भी खुशियां लौटेंगी। देवउठनी पर्व में गन्ने का मंडप बनाया जाता है। तुलसी विवाह संपन्न कराया जाता है। पर्व के लिए जरूरी गन्ना बाजार में नि पहुंच चुका है। इस दिन गन्ना की विषेश मांग रहती है। इसी देवउठनी एकादशी के दिन माता तुलसी का विवाह भगवान विष्णु के साथ हुआ था। इस कारण इस दिन तुलसी विवाह की परंपरा है। देवउठनी पर्व के समय जिला मुख्यालय जांजगीर एवं प्रमुख शहर चंपा बलौदा शिवनारायण एवं अन्य स्थानों में जगह-जगह से गाने का फसल काट कर व्यापारियों द्वारा लाया जाता है इसमें गन्ना अम्बिकापुर व पंडरिया से आता है। इस वर्ष अम्बिकापुर से भी गन्ना नहीं आ रहा है। बताया जाता है कि युक्त स्थानों पर शक्कर की मिलें स्थापित हो गई है, इसलिए गन्ना बाहर नहीं बेचा जा रहा है। फिर भी किसी तरह कम मात्रा में वहा का गन्ना पहुंचा है। इस बार नवागढ़ क्षेत्र के राछाभाठा कटौद, केरा, बम्हनीडीह क्षेत्र से गन्ने की आवक है। अम्बिकापुर का गन्नला लोकल की अपेक्षा महंगा है। इसके पीछे परिवहन चार्ज अधिक लगना बताया जा रहा है। श्रीशालीग्राम की मूर्ति रखकर गन्ने का मंडप बनाया जाता है। घर की चौखट के चारों ओर दीप जलाकर अमरूद, बनवेर, चनाभाजी, सिंघाड़ा, केला, मूली, बैंगन, सेवफल आदि भगवान को समर्पित कर पूजा अर्चना की जाती है बहरहाल पूरे जिले में देवउठनी एकादशी पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है इसे छोटी दीपावली के रूप में लोग मानते हैं।

























