कोरबा। किसान का पसीना बहता है तो धरती सोना उगलती है। इसलिए जो किसान अपने खेतों में जितनी मेहनत करता है, उसका जीवन उतना ही खुशहाल होता जाता है। बरसात एवं ग्रीष्मकाल में धान की दोहरी फसल से किसानों की मेहनत रंग लाती है। रामपुर विधानसभा क्षेत्र की हजारों एकड़ जमीन का ग्रीष्मकालीन धान की पैदावार की जाती है। बारह मासी नदी-नालों के किनारे तथा अपासी क्षेत्र में ग्रीष्मकालीन धान लगाया जाता है। अधिकतर मोटे धान की बोवाई की जाती है। जो लगभग दो माह में तैयार हो जाता है। धान की दोहरी पैदावार से ग्रामीण क्षेत्रों में किसानों को न केवल बेरोजगारी एवं आर्थिक बदहाली से निजात मिलती है, बल्कि उनका रोजमर्रा का जीवन भी खुशहाल हो जाता है। ग्रीष्मकालीन धान की पैदावार एक एकड़ में लगभग 12-15क्ंिवटल होती है। इस धान की शासकीय खरीदी न होने के कारण निजी व्यपारियों द्वारा कम कीमत पर खरीदी जाती है। खरीफ धान की अपेक्षा ग्रीष्म कालीन कम स्वादिष्ट होता है। इसी कारण अधिकांश किसान वर्षाकाल के धान को बचाकर रखते हैं। तथा ग्रीष्मकालीन धान को बेचकर शादी विवाह जैसे बड़े पारिवारिक कार्यों को पूरा करते हैं। इसी कारण धरती को मां कहा जाता है, जो एक के बदले अनेक वापस कर अपने बच्चों की झोले में खुशियां ही खुशियां भर देती है।