सक्ती। बोरदा के किसान की जमीन पर ही लोक निर्माण विभाग ने सक्ती से कोरबा की ओर जाने वाली सडक़ बना दी। किसान ने हाईकोर्ट में मामला दायर किया। हाईकोर्ट ने सीमांकन का निर्देश दिया। सीमांकन से इस बात का खुलासा हुआ कि सक्ती-कोरबा रोड किसान नानसिंह पिता ननकूर्रू गोड़ की प्राइवेट जमीन पर ही बना दी गई है। हाईकोर्ट के निर्देश के बाद सीमांकन के लिए पहुंची राजस्व की टीम ने अंत मे सक्ती-कोरबा पहुंच मार्ग को आवेदक की निजी भूमि बताकर चूना डलवा कर कब्जा करने के लिए बता दिया और सक्ती-कोरबा मार्ग को आवेदक के खेतों के बीच से गुजरना चिह्नांकित कर दिया। इस सीमांकन में आधी से अधिक सडक़ किसान के नाम से बताई गई है। मामला ग्राम बोरदा का है। ग्राम के नानसिंह पिता ननकूर्रू गोड़ की निजी भूमि खसरा नंबर 143/2, 146/2 एवं 146/3 पर लोक निर्माण विभाग द्वारा सक्ती से कोरबा की ओर जाने वाली सडक़ का निर्माण करा दिया गया।
पीडब्ल्यूडी द्वारा सडक़ निर्माण को किसान नानसिंह ने चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में रीट पिटिशन दायर करते हुए दावा किया कि उक्त जमीन उसके नाम से राजस्व अभिलेख में दर्ज है, जिसपर जबरन सडक़ बनाई जा रही है। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट द्वारा सीमांकन का आदेश दिया गया था। तहसीलदार सक्ती बी. एक्का के नेतृत्व में नायब तहसीलदार शिवकुमार डनसेना, आशीष पटेल, अरुण पटेल राजस्व निरीक्षक, गोविंदराम अनंत राजस्व निरीक्षक नजूल, सेवाराम कुर्रे राजस्व निरीक्षक नजूल ,सुश्री नेम्हाती राजस्व निरीक्षक जाजंग, सुकृता बंजारे राजस्व निरीक्षक पोरथा, सत्यनारायण राठौर पटवारी ,अमित त्रिपाठी पटवारी बोरदा के द्वारा सीमांकन कर चूना डलवा कर किसान को कब्जा दिलवाया गया। 2018 में हुआ था आदेश, सीमांकन अब हुआ हाईकोर्ट ने जमीन का सीमांकन करने के लिए वर्ष 2018 में निर्णय पारित किया था, लेकिन राजस्व अधिकारियों ने समय पर सीमांकन का काम पूरा नहीं किया। इसलिए किसान ने हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं होने पर फिर से कोर्ट में अपील की थी, इसके बाद राजस्व अधिकारियों ने सीमांकन किया है। अभी रोड पर कब्जा नहीं, लेकिन बड़ा सवाल आखिर सडक़ बनी कैसे आवेदक किसान ने जनहित को ध्यान मे रखते हुए उच्च न्यायालय बिलासपुर के आदेश के परिपालन मे चिह्नांकित निजी भूमि पर अपने पोल गाड़ दिए, लेकिन सक्ती कोरबा पहुंच मार्ग को निजी भूमि बताने के बाद भी अवरुद्ध नहीं किया। अन्यथा देर शाम सक्ती कोरबा पहुंच मार्ग बंद हो सकता था।
कर दिया है सीमांकन
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद किसान की जमीन का सीमांकन किया गया है। सीमांकन में जितनी जमीन किसान की निकली है, उसमें सडक़ भी शामिल है। सडक़ पर चूना डालकर आवेदक को उसकी जमीन सीमांकन करने के बाद बताया गया है।
– शिव कुमार डनसेना, नायब तहसीलदार, सक्ती