
पूर्वी दिल्ली। नौ साल पुराने मामले में कड़कडड़ूमा कोर्ट ने एक व्यक्ति को दूसरी पत्नी से दुष्कर्म के आरोप से बरी कर दिया, पर उसे पहली पत्नी को धोखा देकर दूसरा विवाह करने का दोषी ठहराया है। कोर्ट ने निर्णय सुनाते हुए कहा कि दूसरी पत्नी को पहले विवाह की पूर्व से जानकारी थी और उसने आरोपों के संबंध में मेडिकल साक्ष्य पेश नहीं किए। ऐसे में उसके द्वारा लगाए आरोप साबित नहीं होते।वहीं, कोर्ट ने कहा कि आरोपित व्यक्ति ने पहली पत्नी के रहते दबाव का हवाला देते हुए दूसरा विवाह कर लिया। इसलिए शिकायत में लगाए गए आरोपों से कोर्ट ने उसे पहली पत्नी को धोखा देकर दूसरा विवाह करने का दोषी ठहराया। इस मामले में सजा पर बहस 24 जनवरी को होगी। गीता कालोनी थाना क्षेत्र निवासी व्यक्ति पर उसकी दूसरी पत्नी ने दुष्कर्म करने, जबरन गर्भपात और मारपीट समेत कई आरोप लगाए थे।उसने सितंबर 2013 में दी गई शिकायत में बताया था कि वर्ष 2011 में चांदनी चौक स्थित एक मंदिर में उसकी मुलाकात आरोपित व्यक्ति से हुई थी। दोनों ही वहां पर सेवादार के रूप में जाते थे। दोनों के बीच दोस्ती हो गई। उसमें यह आरोप लगाया था कि आरोपित व्यक्ति ने शादी का वादा करके उसके साथ कई बार संबंध बनाए।फरवरी 2012 में जब वह गर्भवती हुई तो आरोपित ने गर्भपात कराने का दबाव बनाया था। वह तैयार नहीं हुई तो आरोपित ने जूस में धोखे से गोली मिलाकर खिला दी, जिससे गर्भपात हो गया था। इसके बाद भी आरोपित शादी करने का झांसा देकर संबंध बनाता रहा। मई 2013 में उसकी आरोपित से शादी हुई थी।आरोप लगाया था कि जून 2013 में जब वह दोबारा गर्भवती हुई तो आरोपित फिर से गर्भपात कराने का दबाव बनाने लगा था, जिसके लिए वह तैयार नहीं हुई थी। इसे लेकर आरोपित ने एक दिन झगड़े के दौरान उसकी पिटाई कर दी, जिससे उसका गर्भपात हो गया था। यह भी आरोप लगाया था कि अगस्त 2013 में बाइक पर जाते वक्त आरोपित ने उसे धक्का दे दिया था। शिकायत में दूसरी पत्नी ने इस बात पर जोर दिया था कि आरोपित की पहली शादी वर्ष 2010 में हुई थी, जिसके बारे में उसे आरोपित से विवाह करने के बाद मालूम हुआ था। इस केस में आरोपित के खिलाफ जुलाई 2014 में कई बार दुष्कर्म करने, जबरन गर्भपात, मारपीट करने समेत कई आरोप तय हुए थे।ट्रायल के दौरान कोर्ट ने पाया कि दूसरी पत्नी ने आरोपित की ओर से वैवाहिक रिश्ते खत्म करने के लिए कानूनी प्रक्रिया शुरू करने के बाद दुष्कर्म समेत अन्य आरोप लगाए। यह भी पाया कि उसे आरोपित की पहली पत्नी के बारे में पहले से मालूम था। मारपीट और गर्भपात के संबंध में कोई मेडिकल रिपोर्ट नहीं लगाई गई है। कोर्ट ने यह भी पाया कि आरोपित ने शिकायतकर्ता स्वर दबाव डाले जाने का हवाला देकर अपनी गलती को छिपाने प्रयास किया।




















