परंपराओं को जीवंत रखता है लोक संगीत : शिवराज

कई पुरस्कार से सम्मानित है शर्मा
कोरबा। छत्तीसगढ़ी गीतों को शब्द और स्वर देने वाले कलाकार पंडित शिवराज शर्मा का कहना है कि लोक संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह समाज का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह हमारी परंपराओं को जीवंत रखता है और समय के साथ बदलते हुए समाज का प्रतिबिंब भी प्रस्तुत करता है।
छत्तीसगढ़ राज्य शिक्षक अलंकरण से सम्मानित शिवराज शर्मा ने तरुण छत्तीसगढ़ से बातचीत में कहा की लोक संगीत किसी भी समाज की संस्कृति, परंपराओं और भावनाओं का दर्पण होता है। यह न केवल मनोरंजन का माध्यम है बल्कि समाज की कहानियों, संघर्षों, त्योहारों, और रीति-रिवाजों को पीढ़ी दर पीढ़ी संजोकर रखने का भी काम करता है।
छत्तीसगढ़ के अलावा विभिन्न राज्यों में अन्य राज्यों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुके शिवराज शर्मा ने कहा कि संस्कृति और परंपराओं का संरक्षण लोक संगीत किसी समाज की पहचान होती है। यह गीत और धुनें एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाकर संस्कृति को जीवंत बनाए रखती हैं। अनेक पुरस्कार से सम्मानित श्री शर्मा का कहना है कि समाज की भावनाओं का प्रतिबिंब लोकगीतों में समाज की खुशियां और आशाएं झलकती हैं। उदाहरण के लिए, शादी के गीत, श्रम के गीत, वीर-रस के गीत आदि समाज की विभिन्न भावनाओं को दर्शाते हैं। भवानी भजन गंगा और अपने कई एल्बम को लेकर चर्चित शिवराज शर्मा ने यह भी कहा कि लोक संगीत लोगों को जोडऩे का कार्य करता है। सामूहिक रूप से गाए जाने वाले लोकगीत समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं।

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