कोरबा। जिले के हाथी प्रभावित कटघोरा वनमंडल में गजदल द्वारा ग्रामीणों के घरों को नुकसान पहुंचाए जाने का सिलसिला जारी है।
बीती रात यहां के केंदई वन परिक्षेत्र में मौजूद 15 हाथियों के दल में से एक दंतैल हाथी अलग होकर नजदीकी परला गांव में घुस गया और इसके आखिरी छोर पर स्थित संजय उरांव नामक ग्रामीण के मकान को छतिग्रस्त कर दिया। जिस समय दंतैल ने यहां धावा बोला मकान मालिक संजय उरांव व उसका परिवार सो रहा था। हाथी के आने की आहट सुनकर परिवार के सभी लोग जागे और घर के भितरी क्षेत्र में मौजूद एक कमरे में छिपकर जान बचाई। हाथी काफी देर तक यहां मंडराता रहा। दो घंटे बाद दंतैल ने सुबह होने से पहले जंगल का रूख किया तब मकान मालिक व उसके परिवार के सदस्यों की जान में जान आयी। इससे पहले सभी लोग काफी सहमे हुए थे। तथा डर के मारे कमरे के कोने में छीपे रहे। सुबह होने पर इसकी सूचना रेंजर अभिषेक दुबे, डिप्टी रेंजर सहित क्षेत्र के बीट गार्ड व अन्य कर्मियों को दी गई, जिस पर वन विभाग के अधिकारी व कर्मचारी मौके पर पहुंचे और दंतैल द्वारा रात में किये गए नुकसानी का सर्वे करने के साथ ही रिपोर्ट तैयार की। प्रारंभिक तौर पर ग्रामीण को हजारों रूपए के नुकसान का अनुमान लगाया गया है। वन विभाग पीडि़त परिवार को क्षतिपूर्ति देगा। याद रहे हाथियों को केंदई क्षेत्र का जंगल काफी भा गया है। यहां उसके खाने पीने के लिए पर्याप्त चारा व पानी की व्यवस्था है। तथा यहां का वातावरण भी हाथियों के अनुकुल होने के कारण क्षेत्र को रहवास बनाते हुए हाथी लंबे समय से जमे हुए हैं। हाथियों को खदेडऩे के लिए वन विभाग की ओर से कई बार कोशिशे की गई। लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पायी। हाथियों को खदेड़े जाने पर वे आक्रोशित होकर और भी अधिक उत्पात मचाते थे। इसलिए वन विभाग ने रणनीति बदलते हुए अब हाथियों को खदेडऩे के बजाय इसे जंगल ही जंगल घेरे रहने पर काम कर रहा है। इस प्रयास में वन अमले द्वारा इसकी लगातार निगरानी करने के साथ ही इसे जंगल में ही रखे जाने पर ज्यादा जोर रहता है। काफी हद तक इसमें विभाग को सफलता भी मिल जाती है। लेकिन बीच-बीच में कुछ उत्पाती हाथी वन अमले को चकमा देकर रिहायसी इलाके में पहुंच जाते हैं और वहां जनधन की हानि के अलावा ग्रामीणों के मकान व फसल को भी चौपट कर देते हैं। हाथियों की लगातार मौजूदगी व बीच-बीच में उत्पात के कारण क्षेत्रवासी परेशान है। वे चाहते हैं कि हाथी समस्या का स्थायी समाधान हो, लेकिन इस दिशा में न तो वन विभाग ही कोई विशेष काम कर पा रहा है और ना ही प्रशासन। जिससे क्षेत्रवासियों की दिक्कतें बनी हुई है और वे हाथियों के उत्पात से क्षति सहने को विवश है।

Previous articleबाढ़ आने पर लोगों को बचाने आपदा प्रबंधन ने किया मॉकड्रिल
Next articleकोराई में श्रीमद् भागवत कथा, रुक्मणी मंगल सत्संग पर झूमे भक्त