पर्यावरण स्वीकृति नहीं मिली, गायत्री खदान में उत्पादन बंद

बिश्रामपुर। पर्यावरण स्वीकृति आदेश के अभाव में एसईसीएल बिश्रामपुर क्षेत्र की गायत्री भूमिगत परियोजना में सोमवार से कोयला उत्पादन बंद हो गया है। यहां शनिवार से ही कोयला डिस्पैच पूरी तरह बंद हो गया है। बता दें कि विश्रामपुर क्षेत्र के गायत्री भूमिगत परियोजना के लिए कोयला उत्पादन की वार्षिक क्षमता तीन लाख टन थी।
इस खदान में कोयला उत्पादन बढ़ाने के लिए नवाचार के तहत इसी साल के जनवरी माह से अत्यधिक कंटीन्यूअस माइनर पद्धति के तहत कंटीन्यूअस माइनर के जरिए विदेश से आयातित मशीनों से कोयला उत्पादन प्रारंभ किया गया था। वहीं खदान की वार्षिक उत्पादन क्षमता तीन लाख टन से बढ़ाकर 8.80 लाख टन करने के लिए क्षेत्रीय प्रबंधन द्वारा लंबे समय से पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त करने की कोशिश की जा रही है। कंटीन्यूअस माइनर के जरिए खदान का कोयला उत्पादन बढऩे की वजह से दो दिन पूर्व ही गायत्री खदान ने अपनी वार्षिक उत्पादन क्षमता के अनुरूप करीब तीन लाख टन कोयला उत्पादन पूर्ण कर लिया था, लेकिन काफी कोशिश के बावजूद 8.80 लाख टन वार्षिक क्षमता की पर्यावरण स्थिति का आदेश प्राप्त नहीं होने की वजह से खान प्रबंधन को कोयला उत्पादन बंद करना पड़ा। यह बताना लाजिमी होगा कि दो दशक से भी पुरानी क्षेत्र की गायत्री भूमिगत परियोजना भी सालों से घाटे में चल रही थी। इस खदान में कोयला उत्पादन में व्यापक वृद्धि करने सुरक्षित अत्याधुनिक तकनीक कंटीन्यूअस माइनर के जरिए कोयला उत्पादन करने का निर्णय लिया गया और इसके लिए कंपनी स्तर पर कोलकाता की मैसेज गैनवेल कंपनी से साझेदारी का अनुबंध किया गया था। डायरेक्टर जनरल माइंस सेफ्टी की अनुमति मिलने के बाद अत्याधुनिक मशीनों के जरिए गायत्री खदान से कोयला उत्पादन प्रारंभ किया गया था। गायत्री भूमिगत खदान की वार्षिक कोयला उत्पादन क्षमता तीन लाख टन थी। इसके जवाब में गायत्री खदान प्रबंधन ने बीते रविवार को ही 299663 टन कोयला उत्पादन कर लिया। इसकी वजह से सोमवार को खान प्रबंधन को कोयला उत्पादन बंद करना पड़ा। वार्षिक कोयला उत्पादन क्षमता तीन लाख टन से बढ़ाकर 8.80 लाख टन करने के लिए पर्यावरण स्वीकृति प्राप्त करने की प्रक्रिया युद्ध स्तर पर जारी है। बताया जा रहा है कि मंत्रालय से इसके लिए औपचारिक कार्रवाई पूर्ण हो चुकी है, लेकिन कंसल्ट टू आपरेट की अनुमति प्राप्त करने के लिए सीटीओ रायपुर में प्रबंधन द्वारा कोशिश की जा रही है। अनुमति मिलने के बाद ही प्रबंधन गायत्री भूमिगत खदान से कोयला उत्पादन प्रारंभ कर सकेगा। गायत्री भूमिगत खदान में एक कंटीन्यूअस माइनर मशीन लगने के बाद अब एक और कंटीन्यूअस माइनर मशीन मशीन लगाने की तैयारी प्रारंभ कर दी गई है। आगामी 15 नवंबर तक खदान में दूसरी कंटीन्यूअस माइनर मशीन लगाने की प्रबंधकीय कवायद जारी है। खदान में कोयला उत्पादन बंद हो जाने के कारण प्रबंधन द्वारा कामगारों को दूसरी कंटीन्यूअस माइनर मशीन लगाने वाले कार्य स्थल पर व्यवस्था बनाने के कार्य में लगा दिया गया है। दो कंटीन्यूअस माइनर मशीन से कोयला उत्पादन प्रारंभ होने के बाद खदान के कोयला उत्पादन में व्यापक वृद्धि होगी।

RO No. 13467/10