
जांजगीर-चांपा। प्रदेश में पलायन के मामले में जांजगीर-चांपा और सक्ती जिला आगे रहता है। बड़ी संख्या में यहां हर साल कमाने-खाने के लिए ग्रामीण परदेस चले जाते हैं। कुछ दिनों बाद विधानसभा चुनाव है। ऐसे में शत-प्रतिशत मतदान का संकल्प तभी पूर्ण हो पाएगा जब ये प्रवासी मजदूर वापस लौटेंगे। मगर सक्ती और जांजगीर-चांपा जिले से कितने लोग कमाने-खाने परदेस गए हैं और कितने लोग लौटे हैं, इसका रिकार्ड नहीं रखा जा रहा है। श्रम विभाग में पलायन करने वालों का रिकार्ड नहीं है।
पलायन कर गए मजदूरों के नहीं आने की स्थिति में शत-प्रतिशत मतदान का लक्ष्य प्रभावित हो सकता है। गौरतलब है कि कोरोना काल में जब प्रवासी मजदूरों के लौटने का सिलसिला शुरु हुआ था तब करीब 1 लाख 15 हजार लोग परदेस से जिले में लौटे थे। कमाने-खाने जाने वाले की जानकारी रखने के लिए पंचायतों में पलायन पंजी की व्यवस्था की गई थी लेकिन कहीं भी इसका पालन नहीं होता है। वर्तमान में पलायन की जानकारी रखने के लिए ऑनलाइन रिकार्ड की व्यवस्था भी बनाई गई है। बकायदा ग्राम पंचायतों में सचिवों को आई-डी पासवर्ड उपलब्ध कराया गया है लेकिन विडंबना है कि किसी भी पंचायतों में सचिवों के द्वारा ऑनलाइन एंट्री नहीं की जा रही है। यही वजह है कि ऑनलाइन रिकार्ड ही नहीं है कि कितने जा रहे हैं और कितने लौट रहे हैं।
इस संबंध में जिला श्रमपदाधिकारी का कहना है कि सभी पंचायतों के सचिवों के माध्यम से जानकारी अपेडट रखने निर्देशित किया जाता है। जिले में ज्यादातर धान कटाई के बाद भी पलायन में लोग जाते हैं। जिले में अभी पलायन की स्थिति नहीं है।
जिले के सभी पंचायतों में ग्राम पंचायत स्तर पर सचिवालय में ऑनलाइन रिकार्ड रखने प्रवासी पोर्टल बनाया गया है। इसमें रिकार्ड अपडेट रखने की जिम्मेदार पंचायत सचिवों को दी गई है। इसके लिए उन्हें श्रम विभाग की ओर से लॉगिन आईडी और पासवर्ड दिया गया है ताकि अगर उन्हें पंचायत क्षेत्र से कोई भी व्यक्ति या परिवार कमाने-खाने के नाम पर बाहर जाते हैं तो उसकी जानकारी पोर्टल में डाले मगर जिले में पोर्टल में आंकड़ा जीरो नजर आ रहा है।





























