कोरबा। चैत्र नवरात्र पर्व जिले में आस्था और विश्वास के साथ मनाया जा रहा है। विशेषता यह है कि इस बार कोई तामझाम नहीं, कोई शोरगुल नहीं। चहल-पहल भी गायब। मंदिरों में सन्नाटा है। श्रद्धालुओं ने अपने घरों में तीसरे दिन देवी चंद्रघण्टा स्वरूप की आराधना की। अगले 6 दिन तक श्रद्धालु पूरे भक्तिभाव से अध्यात्म और सनातन मूल्य के प्रति एकाग्रता से जुड़े रहेंगे।
कोरोना इफेक्ट के साय में नवरात्र पर्व मनाने का यह पहला मौका है। इस दौरान भक्तों के पास समय ही समय है। कहीं किसी तरह की झंझट नहीं। कारण यह है कि उन्हें अधिकांश समय घर में ही बिताना है। इसका सदुपयोग हो, इसके लिए नवरात्र पर्व सबसे अच्छा अवसर है। भीड़भाड़ के कारण कोरोना का इंन्फेक्शन संभव है,इसलिए सरकार ने मंदिरों में अनावश्यक भीड़ पर रोक लगाई है। लोगों को हर तरह के कार्य अपने स्तर पर ही करना है। नवरात्र पर्व भी इसी का हिस्सा है। भक्तों ने शुक्रवार को देवी के तीसरे स्वरूप चंद्रघण्टा की आराधना करने के साथ उनका ध्यान किया। आदि शक्ति की उपासना के साथ लोग मंगल की भावना से आगे बढऩे की प्रार्थना की गई। कोरबा नगर और उपनगरीय क्षेत्रों के देवी मंदिरों में पुजारियों ने मुख्य ज्योतिकलश और विग्रह के दर्शन करने के साथ पर्व की परंपराओं को जारी रखा। नवरात्र पर व्रत करने वालों के अलावा जनसामान्य ने भी पूरे सात्विक भाव से इष्टदेवी की पूजा अर्चना करने की मानसिकता बना रखी है। लोगों का जोर इस बार मंदिरों के बजाय घर में कुल देवी का ध्यान जप, पूजन और खास तौर पर अपने आसपास और वैश्विक स्तर पर फैली महामारी के नियंत्रण करने पर है। इसी लिहाज से पूजा के क्रम में उन मंत्रों का जाप भी किया जा रहा है, जिनमें हर तरह के अनिष्ट और प्रतिकुल परिणाम के कारकों को नष्ट करने की क्षमता होती है। श्रद्धालुओं ने बताया कि अगले दिनों में देवी के 6 स्वरूप की पूजा अर्चना करने के साथ सांकेतिक रूप से कन्या पूजन किया जाएगा और 2 अप्रैल को मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम चंद्र के प्राकट्य उत्सव को मनाया जाएगा।
सार्वजनिक आयोजन कहीं भी नहीं
कई दशक में ऐसा पहली बार हो रहा है जबकि नवरात्र जैसे विशेष अवसर पर देवी मंदिरों में सार्वजनिक आयोजन नहीं हो सके। कोरोना वायरस के संक्रमण को देखते हुए सरकार ने सभी तरह के सांस्कृतिक और धार्मिक कार्यक्रमों का निषेध कर दिया है। मंदिरों में इस कारण से सन्नाटा पसरा हुआ है। पुजारी और चुनिंदा लोग ही यहां उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। जिले के सभी देवी मंदिरों में एक जैसा हाल है। सुभाष ब्लॉक कालीबाड़ी मंदिर में चैत्र नवरात्र पर मंडप बनाकर प्रतिमा विराजित करने का विधान है। यहां इस बार यह सब नहीं हो सका और न ही भक्तों को भोग मिल सका।