
जांजगीर-चांपा। यदि आप पीथमपुर से गाड़ापाली भादा रूट में जाएंगे तो आपको दर्जनों चेन माउंटेन मशीन कतारबद्ध दिखाई पड़ेंगी। करोड़ों रुपए की यह चेन माउंटेन ऐसी ही नहीं पड़ी होती। दरअसल, इनका काम रात में होती। दरअसल, काम रात में करना होता है। इसके बाद दिन में इन मशीनों को नदी से निकालकर नदी के बाहर पेड़ की छांव में छिपा दिया जाता है। खनिज विभाग भी इन्हें पकडऩे बेबस नजर आती है क्योंकि इन्हें रेत चैवख नजकरते रंगे हाथ नहीं पकड़ा जा सकता। क्योंकि ये रात को ही काला कारोबार करते हैं।
दिलचस्पबात यह है कि रात को खनिज अमला छापेमारी कर नहीं सकती। क्योंकि खनिज अफसरों का कहना है कि हमारे पर रात को कार्रवाई करने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं है और न ही किसी तरह का बल है। जिसका फायदा
उठाकर रेत माफिया काला कारोबार करते हैं। दरअसल, पीथमपुर से गाड़ापाली भादा की सडक़ में आएंगे तो आपको दर्जनों चेन माउंटेन मशीन दिखाई देगी। इनका प्रमुख कार्य रात को रेत की अवैध खुदाई है। रात को हसदेव नदी से रेत निकालते हैं और ट्रैक्टर में लोडकर रेत को आसपास में डंप किया जाता है फिर इसे दिन में खपाया जाता है। यह खेल बदस्तूर बीते कई सालों से जारी है। लेकिन खनिज अफसरों का ध्यान केवल सडक़ में परिवहन कर रहे रेत कारोबारियों पर रहता है। इसके चलते ऐसे चेन माउंटेन वाले वाहन पकड़े नहीं जाते और ट्रैक्टर से रेत का परिवहन करने वाले पकड़े जाते हैं।
गाड़ापाली भादा रेत घाटों में कार्रवाई के लिए। निकलेंगे। यहां कई बार कार्रवाई करते हुए कारोबारियों पर लाखों का जुर्माना वसूल चुके हैं हरकतों बाज नहीं आते।
हेमंत चेरपा, जिला खनिज अधिकारी





















