पेंड्रारोड- नवगठित पेंड्रा गौरेला मरवाही को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य को लोकार्पित कर दिया, इसी के साथ ही प्रदेश को 28 वाँ ज़िले के रुप में बिलासपुर से पृथक होकर मरवाही पेंड्रा गौरेला के रुप में मिल गया है।

सात मिनट सैंतालिस सेंकड के छत्तीसगढी भाषण में CM भूपेश बघेल ने नवगठित ज़िले को शुभकामना दी। उन्होंने इस मौक़े पर दो अहम ऐलान किए
“मरवाही पेंड्रा गौरेला ज़िले के भौगोलिक नक़्शे में पसान का आरआई ईलाका शामिल होगा.. नवगठित ज़िले में अरपा का उद्गम है इसलिए यहाँ हर वर्ष अरपा महोत्सव मनेगा”

CM भूपेश बघेल ने इस मौक़े पर कहा-“मैं राजेंद्र शुक्ला जी के साथ पदयात्रा किया था इस क्षेत्र में.. गाँव गाँव गया था.. लोगों ने कहा ज़िला बनाईए.. “CM भूपेश बघेल ने आगे जोड़ा “माँग तो बहुत दिन से थी .. इच्छा भी बहुत दिन से थी.. जोगी जी की भी इच्छा थी..” मुस्कुराते हुए मुख्यमंत्री बघेल ने कहा “मौजूदा नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक जी की इच्छा थी या नहीं लेकिन फिर भी थी”
CM बघेल ने कुछ इस तरह अपनी बात पूरी की –“ लेकिन ज़िला बनाने का सौभाग्य मुझे मिला.. आज राजेंद्र शुक्ला जी की जयंती है, मैं उन्हें याद करता हूँ.. विधानसभा अध्यक्ष थे, मंत्री थे और साहित्यकार भी थे.. वे बहुत सम्मानित थे और उनका बहुत योगदान है.. मैं माधवराव सप्रे को भी याद करता हूँ… हिंदुस्तान में सबसे बढिया वातावरण कहीं है तो वह इस इलाक़े में है..तब ही रविंद्रनाथ टैगोर अपनी बीमार पत्नी को लेकर यहाँ आए थे.. यह वो ईलाका है जहां के चावल शहद में सबसे ज़्यादा मिठास है.. काला चावल भी यहाँ होता है और भालू भी मिलता है.. लेकिन सबसे ज़्यादा मिठास यहाँ के लोगों में है.. यहाँ की बोली में है.. मैं आप सबको शुभकामनाएँ देता हूँ .”

इस मौक़े पर दिलचस्प वह संबोधन था जो कि CM भूपेश बघेल ने पूर्व मुख्यमंत्री अजित जोगी और श्रीमती रेणु जोगी को दिया.. उन्होंने कहा –“लोकप्रिय विधायक अउ हमर पहिलि मुख्यमंत्री आदरणीय अजित जोगी जी.. आदरणीया भाभीजी रेणु जोगी जी”
कार्यक्रम के अंत में CM भूपेश बघेल सीधे अजित जोगी के पास पहुँचे जो कि मंच में कोने पर मौजूद थे,दोनों ने बेहद गर्मजोशी से हाथ मिलाया।