रायपुर /छत्तीसगढ़ में पिछले 10 दिनों से चल रही पेट्रोल-डीजल की राशनिंग बड़े संकट में बदलती दिख रही है। ऑयल कंपनियां अलग-अलग बहानों से तेल की आपूर्ति रोक रहीं हैं। हालात ऐसे हैं कि डीलरों की ओर से अग्रिम भुगतान के बाद भी तेल की खेप नहीं पहुंच रही है। इन सबके बीच प्रशासन अब तक लगभग लाचार है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार से पूछा है कि क्या हम श्रीलंका जैसे हालात की ओर बढ़ रहे हैं?

खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता संरक्षण विभाग के विशेष सचिव मनोज कुमार सोनी ने मीडिया से बातचीत में कहा, कंपनियां इसकी कोई ठोस वजह नहीं बता रही हैं। हिंदुस्तान पेट्रोलियम में सबसे अधिक दिक्कत है। वहां प्रबंधन से बातचीत में यह बात सामने आई है कि पेट्रोल-डीजल के जो नए रेट आए हैं उनसे उनको नुकसान हो रहा है। वहीं कंपनी ने भुगतान की नीति बदली है। अब एडवांस पेमेंट मिलने पर ही टैंकर रवाना किया जा रहा है। जो डीलर एडवांस पेमेंट नहीं कर रहे, उनके यहां तेल की खेप पहुंचने में दिक्कत हो सकती है। एक दिन पहले जिला प्रशासन के पूछने पर कंपनी के क्षेत्रीय कार्यकारी अधिकारियों ने बताया था कि रिफाइनरी में तकनीकी दिक्कत की वजह से आपूर्ति प्रभावित हुई है।

छत्तीसगढ़ पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अखिल धगट का कहना इसके उलट है। धगट का कहना है कि भुगतान की कोई समस्या ही नहीं है। पहले ऑर्डर पर कंपनी ट्रक रवाना कर देती थी, उसकी मांग यही रहती थी कि उसी दिन शाम तक उसका भुगतान उनको मिल जाए। ऐसा होता भी था। बाद में कंपनियों ने अग्रिम भुगतान का सिस्टम शुरू किया। शुरू में कुछ लोगों ने लापरवाही की, लेकिन लंबे समय से अग्रिम भुगतान पर तेल मंगाना चल रहा था। पिछले कुछ दिनों से ऐसा हुआ कि अग्रिम भुगतान के चार-पांच दिन बाद भी तेल की खेप नहीं पहुंच रही है।

कहा जा रहा है कि सब सामान्य है?

अखिल धगट का कहना था, यहां डीलर और ग्राहक किल्लत से जूझ रहा है। केंद्र सरकार का कहना है कि कहीं कोई किल्लत नहीं है। सब सामान्य है। उनके बाद तीनों कंपनियों, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के प्रमुख भी कह रहे हैं कि सब ठीक है। धगट सवाल उठाते हैं कि अगर सब ठीक है ताे तेल मिल क्यों नहीं रहा?

मुख्यमंत्री बोले, स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करती केंद्र सरकार

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पेट्रोल-डीजल की किल्लत को आर्थिक संकट से जोड़ दिया है। मुख्यमंत्री ने कहा, पूरे देश में आपूर्ति घटाई जा रही है। क्या हम लोग श्रीलंका की जो स्थिति है उस दिशा में जा रहे हैं। वहां सबसे पहले पेट्रोल-डीजल मिलना ही बंद हुआ था। केंद्र सरकार को यह मामला स्पष्ट करना चाहिए। क्यों ऐसा हो रहा है कि पेट्रोल डीजल में 30-30, 40-40% कटौती की जा रही है। इससे ट्रांसपोर्टिंग प्रभावित होगा। महंगाई बढ़ेगी। अभी खेती-किसानी का सीजन आ गया है। डीजल नहीं मिलेगा तो खेती भी प्रभावित होगी। हमारे यहां धान, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी बोने का सीजन आया है। ऐसे समय में डीजल नहीं होगा तो संकट में हम लोग फंस सकते हैं।

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