पुलिस का संरक्षण होने से दूसरे जिले से भी आते है खिलाड़ी, जिले के युवा वर्ग हो रहे है बर्बाद ,गंवा रहे पूंजी
सीताराम नायक

जांजगीर चांपा। जिले के बलौदा ब्लॅाक में स्थित छाता जंगल इन दिनो जुआडिय़ों क ा प्रमुख केन्द्र बना हुआ हैं, जहाँ लाखों का जुआ महिनो से संचालित हो रहा हैं, लेकिन पुलिस विभाग इसे पकडऩे में कोताही बरत रही है, नतिजा यह है कि क्षेत्र के बेरोजगार युवक इससे पूरी तरह प्रभावित होने लगें है, और अपने पूर्वजो क ी पूँजी को बेचकर जुऐ में गंवाते जा रहे हैं। वैसे तो छाता जंगल ही अकेला जांजगीर चांपा वन का क्षेत्र हैं, जिसे वन माफिया समय-समय पर हानि पहुंचाने का कार्य करते रहते है,किन्तु क ुछ समय से जुआ खिलाने वाले लोग उसे अपना शरण स्थल बना लिए हैं, जहाँ कई लाख रूपये का दाव रोजाना लगता हैंै। इस जुए को कु छ लोग सिंड़ीकेट बनाकर खेला रहें है। जिसकी खबर बलौदा पुलिस व जिला मुख्यालय के कुछ कथित अधिकारीयों को भी है जो इन जुआडिय़ों को संरक्षण देने का काम कर रहे है। जिस वजह से यह जुआ बड़े पैमाने पर चल रहा हैं।
विदित हो की इस छाता जंगल गाँव में जुआ खेलने जांजगीर-चाम्पा के आलावा कोरबा, बिलासपुर ,बलौदा बाजार आदि जिलो से भी लोग जुआ खेलने आते हैं। जांजगीर चांपा के जुआड़ी यहाँ तो आते ही हैं, साथ में अपने अन्य जिलो के मित्रो को साथ में बुलाकर जुआ खेलने जाते हैं, ऐसे में इस गैर कानूनी काम को रोकने मे पुलिस की जरा भी रूचि नहीं है ।
बताया जाता है कि बलौदा थाना, पंतोरा चौकी तथा नैला पुलिस चौकी तीनों को प्रत्येक माह जुआ खेलने वाले लोगों से एक मोटी रकम दी जाती है, जिसके कारण इन तीनों जगह के पुलिस वालों का संरक्षण इन्हे प्राप्त है, जिसके कारण युवा वर्ग उस काराबार से भारी बरबाद हो रहें है। यह बताना जरूरी है कि छाता जंगल गाँव वैसे भी लूटपाट तथा वन जीवों के शिक ार के लिए हमेशा से चर्च में रहता हैं, इस जगह पर अब जुआ खेलने वाले लोग डेरा डाले दिये है। जानकारों का कहना है कि जो लोग जुआ खेला रहे है है उन्हे कुछ नेताओं का भी संरक्षण प्राप्त होने के कारण वे पुलिस वालों से सेटिंग करने मे जरा भी संकोच व डरते नही करते जिसके कारण वे पुलिस वालों का मुंह लगा हो गयो है आज जिस पैमाने पर बलौदा के छाता जंगल मे जुआ हो रहा है इससे अनेक घर बर्बाद होने की स्थिति से गुजर रहे है और उक्त लोग इसे एक कारोबार की तरह खुलेआम चला रहे है जिसके कारण न सिर्फ युवाओं का आर्थिक नुकसान होने लगा हैं बल्कि जंगल में स्थित वन वशु प्रक्षियों को हमसे खतरा होने का भी अंदेशा दिखाई देने लगा हैं, इसलिए न केवल पुलिस प्रशासन को बल्कि वन विभाग को इस ओर ध्यान देने की जरूरत हैं।