जांजगीर-चांपा। आजादी के अमृत महोत्सव के अवसर पर जिले के निर्यात की संभावना विषय पर कलेक्टर जितेन्द्र कुमार शुक्ला की अध्यक्षता में संगोष्ठी आयोजित की गई। कलेक्टर ने कहा कि आकर्षक एवं गुणवत्ता युक्त उत्पाद की मांग बाजार में स्वभाविक रूप से होती है। उन्होंने कहा कि जांजगीर-चांपा कृषि प्रधान जिला है। यहां धान का रिकार्ड उत्पादन होता है। धान सहित अन्य उत्पाद को गुणवत्ता युक्त आकर्षक ब्रांडिंग कर निर्यात योग्य बनाया जा सकता है। यहां कोसा सिल्क का विदेशों में निर्यात पहले से होता आ रहा है। कलेक्टर ने कहा कि निर्यात के लिए उत्पादन क्षमता, गुणवत्ता बढ़ानी होगी। इससे जिले की अपनी पहचान बनेगी और स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा।
उन्होंने कहा कि राज्य शासन की एनजीजीबी योजना के तहत जिले के सभी पंचायतों में गौठान के लिए शासकीय भूमि एवं अन्य संसाधन उपलब्ध करवाया जा रहा है। इन गौठानों में कोसा उत्पादन बढ़ाने के लिए अर्जुन सहित अन्य पौधे लगाये जा रहे हैं। इससे कोसा बुनकरों को कधाा माल स्थानीय स्तर पर सस्ते में उपलब्ध होगा और निर्यात की मात्रा को भी बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने कहा कि जिले के अन्य स्थानीय उत्पाद को भी गुणवत्तायुक्त और उत्पादन की मात्रा को बढ़ाकर निर्यात के लिए विदेशों में बाजार की तालाश की जा रही है। राज्य सरकार की उद्योग नीति का लाभ लेते हुए जिला प्रशासन द्वारा प्रशिक्षण एवं अन्य सुविधाएं व्यापारियों और उत्पादकों को उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने उपस्थित सभी अधिकारियों, व्यापारियों और किसानों से कहा कि निर्यात योग्य उत्पाद को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव तैयार करें। जिला प्रशासन द्वारा हर संभव प्रोत्साहन दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ राज्य हथकरघा विकास के विपणन सहकारी संघ मर्यादित के अध्यक्ष मोतीलाल देवांगन ने कहा कि जिले के उत्पाद को विदेशी बाजारों में उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। राज्य शासन के सहयोग से प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। जिससे यहां के उत्पादक और व्यापारी निर्यात करने वाले व्यापारिक संस्थानों के संपर्क में आएंगे। विदेशी बाजार की मांग के अनुरूप यहां के उत्पाद को गुणवत्तायुक्त एवं अधिक मात्रा में उत्पादन करने की आवश्यकता होगी। इससे विदेशी मुद्रा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार भी उपलब्ध होगा। इस अवसर पर व्यापार एवं उद्योग विभाग के महाप्रबंधक बीपी वासनिक, सहित कृषि, बैंक, हाथकरघा, रेशम, नाबार्ड, ग्रामोद्योग, के अधिकारियों ने विभागीय योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया। व्यावसाय और उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बैंक ऋण एवं अनुदान योजनाओं की चर्चा की गई।

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