
कोरबा। व्यवसायिक प्रयोजन से उपयोग में लाए जा रहे भारी वाहनों के मामले में कई प्रकार के नियम बनाए गए हैं और विभिन्न राज्यों में इसे लेकर विरोधाभास कायम है। भारत सरकार के उपक्रम एनटीपीसी की कोरबा परियोजना में दूसरे राज्यों के भारी वाहनों को हटाने को लेकर छत्तीसगढ़ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन आरपार की लड़ाई के मूड में है। आज उसने यहां एनटीपीसी गेट पर इस मसले को लेकर प्रदर्शन किया।
प्रदर्शन को लेकर बताया गया कि 2.1 वायलेंस को लेकर यह सब किया गया है। दरअसल ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी द्वारा वाहनों के पंजीकरण और उनकी उपयोगिता के बारे में व्यवस्था बनाई गई है और उक्तानुसार कामकाज किया जाना है। इन सबके बावजूद देश के कुछ राज्यों में नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए कई प्रकार से चालकों को परेशान किया जा रहा है और अपने वर्चस्व को बनाए रखने की नीति पर काम किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में इसे लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष दिनेश सिंह ने बताया कि हमारे प्रदेश से सामान लेकर भारी वाहन जब दूसरे राज्यों में पहुंचते हैं तो एनटीपीसी की परियोजनाओं में परिसर के बाहर ही सामान अनलोड करने को लेकर दबाव रहता है। यह सब छत्तीसगढ़ के वाहन मालिकों और चालकों से परहेज का एक फंडा है। ऐसा करने के साथ यहां के कारोबारियों को हासिए पर ले जाने की साजिश है। महाराष्ट्र, ओडि़सा, केरल, तेलंगाना सहित उन राज्यों में सर्वाधिक समस्याएं हैं जहां पर कई कारणों से भेदभाव जारी है। इसके ठीक उल्टे हैरान करने वाली बात यह हो रही है कि छत्तीसगढ़ और कोरबा क्षेत्र में दूसरे राज्यों के वाहनों का बोलबाला है और वे मनमाने तरीके से अपनी गतिविधियां चलाए हुए है। यह सब हमें बर्दाश्त नहीं है। छत्तीसगढ़ ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने पूरी बात प्रशासन और प्रबंधन की जानकारी में लाने के साथ अपनी पहल तेज की है और एनटीपीसी के सीपत परियोजना में बाहरी वाहनों की दखल को बंद करा दिया है। एसोसिएशन चाहता है कि कोरबा परियोजना में भी यही व्यवस्था तत्काल प्रभावशील हो और स्थानीय लोगों को लाभान्वित किया जाए। आज के प्रदर्शन के एनटीपीसी प्रबंधन को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा गया। पूरे मामले की जानकारी इसमें दी गई है और आशा की गई है कि सामाजिक उत्तरदायित्व के साथ-साथ स्थानीय लोगों के सामाजिक और आर्थिक हितों की परवाह करते हुए एनटीपीसी जल्द ही उचित कदम उठाएगा।

























