
जांजगीर – चांपा । बैंक और एटीएम की सुरक्षा उपायों को लेकर बैंक प्रबंधन गंभीर नहीं है। ग्राहकों की जमा की गई रकम बैंक द्वारा कराए गए बीमा के भरोसे ही सुरक्षित है। जबकि आए दिन बैंकों और एटीएम बूथों में चोरी की वारदातें होती रहती है, लेकिन प्रबंधन न तो गार्ड की व्यवस्था करते हैं और न ही सुरक्षा के कोई उचित इंतजाम। चार दिन पहले चंद्रपुर के एसबीआई में सेंधमारी कर चोरी का असफल प्रयास किया गया। इसके आरोपित अभी तक पकडे नहीं गए हैं। अविभाजित जिले में 25 राष्ट्रीयकृत बैंकों की 120 शाखाएं है, जिसमें से केवल दर्जनभर शाखाओं में ही सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था है। 67 बैंकों में सशस्त्र बल सुरक्षा गार्ड नहीं है। जबकि अधिकांश में न ही अलार्म है और न पुलिस को सूचना देने के लिए कोई प्रबंध है। जिले के छोटे- बड़े शहरों मेंएसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक आफ महाराष्ट्र, बैंक आफ बड़ौदा सहित करीब 25 राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाएं खुल गई है। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में जिला सहकारी बैंक और ग्रामीण बैंक की शाखाएं हैं। बैंक प्रबंधन केवल अपना कारोबार चलाकर धन इक_ा करने में लगे हुए है। बैंक की सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। सुरक्षा के नाम पर केवल भारतीय स्टेट बैंक ने ही अपने प्रमुख शाखाओं में सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था की है। जांजगीर, चांपा, सक्ती, अकलतरा के की शाखाओं में सशस्त्र सुरक्षा गार्ड की व्यवस्था है। वहीं बैंक आफ बड़ौदा और जिला सहकारी बैंक ने गार्ड और सीसीटीवी की व्यवस्था की है। इसके अलावा जिले के किसी बैंक की शाखाओं में सुरक्षा का कोई इंतजाम नहीं हैं। बैंक अधिकारियों की बैठक लेकर पुलिस व्यवस्था सुधारने के निर्देश दे चुकी है। मगर इसके बाद भी बैंक प्रबंधन लापरवाह बने हुए हैं। ंएटीएम में रकम डालने वाले कर्मचारियों का सत्यापन भी समय-समय पर कराया जाना चाहिए लेकिन बैंक प्रबंधन द्वारा कर्मचारियों का न ही वेरीफिकेशन कराया जाता है और न ही उनका कोई रिकार्ड रखा जाता है। क्योंकि यह सारा काम ठेके पर होता है इसलिए बैंक प्रबंधन इस पर ध्यान नहीं देते। कई बार ऐसे कर्मचारी ही एटीएम से रकम लूट के मामले में शामिल रहते हैं। ढाई साल पहले अकलतरा के एटीएम में तोडफ़ोड़ कर रकम चुराने वाले गिरोह का मास्टर माइंड एटीएम में रकम डलने वाला कर्मचारी ही था। बैंक की सुरक्षा को लेकर दो साल पहले पुलिस ने शाखा प्रबंधकों से 26 बिंदु में जानकारी मांगी थी। शाखा प्रबंधकों ने जो जानकारी पुलिस को दी है वह चौंकाने वाली है। जिले के 80 प्रतिशत बैंकों और एटीएम में सुरक्षा के इंतजाम नहीं हैं। न तो इन बैंकों में कॉम्बिनेशन लॉक सिस्टम है और न ही स्ट्रांग रूम में टाइम डिले लॉक सिस्टम लगाया गया है। यदि किसी बैंक में कुछ घटनाएं हो जाती है तो अधिकारियों के पास पुलिस को सूचना देने के लिए कोई सिस्टम भी नहीं है। 40 फीसदी बैंकों में तो अनधिकृत रूप से प्रवेश करने पर बजने वाला अलार्म भी नहीं लगा है। बैंक अधिकारियों की माने तो वे बैंक में रखे अपने रकम की रक्षा बीमा कराकर रखते है। बैंक में जितनी राशि रहती है उसका बीमा रहता है। जब भी बैंक में रखे रकम की चोरी होती है या आगजनी में नुकसान होता है तब बीमा कंपनी उतनी राशि का भुगतान कर देती है। बीमा कराने के बाद बैंक प्रबंधन सुरक्षा के मामले में लापरवाही बरतते हैं। किसी प्रकार की घटना होने पर पुलिस की परेशानी बढ़ जाती है। ग्राहकों की सुविधा के लिए भले ही बैंकों के एटीएम संचालित हैं, लेकिन यहां सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं है। एटीएम में सुरक्षा के लिए गार्ड व जवानों की तैनाती नहीं की गई है। एटीएम की सुरक्षा केवल सीसीटीवी के भरोसे होती है। सुरक्षा के उपायों को लेकर बैंक प्रबंधन गंभीर नहीं है। प्रबंधन न तो गार्ड की व्यवस्था करता है और न ही सुरक्षा का कोई उचित इंतजाम करता है।





























