नई दिल्ली: ब्राजील स्वास्थ्य नियामक एन्विसा (ANVISA) ने भारत बायोटेक द्वारा निर्मित कोरोना वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ को स्वीकृति देने से इनकार कर दिया है और कहा है कि यह मैन्युफैक्चरिंग मानकों पर खरा नहीं उतरता है.

रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस आकलन को आधिकारिक गैजेट में 30 मार्च को प्रकाशित किया गया था.ब्राजील सरकार ने वैक्सीन के दो करोड़ डोज प्राप्त करने के लिए ब्राजील में भारत बायोटेक का प्रतिनिधित्व करने वाली कंपनी ‘प्रेसिस मेडिकामेंटोस’ के साथ एक कॉन्ट्रैक्ट साइन किया था.हालांकि देश में इस वैक्सीन के इस्तेमाल के लिए एन्विसा की मंजूरी मिलना बेहद जरूरी होता है.

जनवरी 2021 में जारी एक प्रेस रिलीज में भारत बायोटेक ने कहा था, ‘दोनों पक्षों के बीच यह तय हुआ है कि ब्राजील की सरकार द्वारा प्रत्यक्ष खरीद के माध्यम से सार्वजनिक बाजार के लिए कोवैक्सीन की आपूर्ति की जाएगी. निजी बाजार में आपूर्ति एन्विसा, जो कि ब्राजील की नियामक प्राधिकरण है, की मंजूरी पर आधारित होगी.

’भारत बायोटेक ने ब्राजील में अपनी वैक्सीन ‘कोवैक्सीन’ के आपात मंजूरी के लिए आठ मार्च को आवेदन किया था. ब्राजीलियन वेबसाइट यूनिवर्सो ऑनलाइन के मुताबिक टीके की डिलीवरी मार्च और मई के बीच होनी थी.

हालांकि अभी ये स्पष्ट नहीं है कि ब्राजील द्वारा कोवैक्सीन की खरीदी में देरी की जाएगी, रद्द किया जाएगा या फिर आंशिक रूप से रद्द किया जाएगा.

रिपोर्ट के मुताबिक ‘अच्छे उत्पादन प्रैक्टिस के कई नियमों के अनुपालन करने में नाकामी’ के चलते कोवैक्सीन मैन्युफैक्चरिंग मानकों पर खरा नहीं उतर पाया है. इसमें दस्तावेजीकरण, आकलन के तरीकों इत्यादि चीजें शामिल थीं. इसके साथ ही जीवाणुरोधी, कीटाणुनाशक, वायरस को हटाने या निष्क्रिय करने के लिए अपनाए गए तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाया गया था.

एन्विसा से मंजूरी पाने वाले कोविड-19 टीकों में कोरोनावैक (सिनोवैक बायोटेक द्वारा उत्पादित), जॉनसन एंड जॉनसन वैक्सीन, फाइजर-बायोएनटेक वैक्सीन और ऑस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी वैक्सीन शामिल हैं.

इससे पहले द वायर साइंस ने रिपोर्ट कर बताया था कि भारत बायोटेक ने 40 से ज्यादा देशों में कोवैक्सीन की मंजूरी के लिए नियामक दस्तावेज फाइल करना शुरू किया है. कंपनी ने दावा किया था कि इन देशों में ब्राजील, फांस और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं.

मालूम हो कि भारत में आपात इस्तेमाल के लिए भारत बायोटेक की कोवैक्सीन को मिली मंजूरी को लेकर विवाद खड़ा हुआ था.