जांजगीर-चांपा। ओवरलोड वाहनों के दिन-रात फर्राटे भरने से एनएच की सूरत बिगडऩे लगी है। परिवहन मंत्रालय ने ऐसे वाहनों के लिए दिशा-निर्देश जारी किया है, लेकिन जिले में इस गाइड-लाइन की धज्जाी उड़ रही है। इन वाहनों पर नियंत्रण नहीं होने से सड़क जल्दी खराब हो रही है, जिसका खामियाजा आम लोगों को जान देकर भुगतना पड़ता है। यहां यातायात पुलिस व परिवहन विभाग द्वारा गिनती के ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई कर औपचारिकता निभा दी जाती है।
जिला सहित रायगढ़ व कोरबा क्षेत्र में औद्योगिक संयंत्रों की भरमार है। यहां सामान लोड-अनलोड करने ओवरलोड वाहन एनएच क्रमांक 49 से चौबीसों घंटे आवागमन करते हैं। नियमत: ऐसे वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध है, वहीं परिवहन मंत्रालय ने भी ऐसे वाहनों की आवाजाही पर बेन लगाया था। मंत्रालय ने अपने गाइड-लाइन में सजा व जुर्माने का भी प्रावधान किया था, लेकिन परिवहन विभाग के अफसर लगातार इसकी अनदेखी कर रहे हैं। हालांकि यातायात पुलिस व परिवहन विभाग द्वारा गिनती के ओवरलोड वाहनों के खिलाफ कार्रवाई कर औपचारिकता निभा दी जाती है। इधर, हर साल एनएच विभाग गड्ढों को भरकर सड़क को आवागमन योग्य बनाता है, लेकिन भीमकाय वाहनों के आवागमन पर रोक नहीं लगने से सड़क के परखच्चे उड़ जाते हैं। परिवहन विभाग व यातायात पुलिस द्वारा ओव्हरलोड वाहनों की जांच नहीं होती। जिला मुख्यालय के मुख्य मार्ग पर दिन रात सैकड़ों की संख्या में वाहन फर्राटे भरते हैं, जिसमें से अधिकांश ओव्हरलोड वाहन होता है, मगर जांच के दौरान ऐसे वाहन चालको के खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती।
राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 49 में जिले की सीमा कुटीघाट से मसनियाकला तक है। इस बीच गेमन पुल सहित लगभग सौ की संख्या में पुलिया स्थित है। भीमकाय वाहनों के बेखौफ आवाजाही से पुल-पुलिया कमजोर हो गए हैं, जो लंबे समय तक साथ देने योग्य नहीं है। पुल-पुलिया में लगे लोहे के एंगल भी क्षमता से अधिक वाहनों के गुजरने से जवाब दे देते हैं। भीमकाय वाहनों पर रोक लगाने यदि ठोस कदम नहीं उठाया गया तो कभी भी गंभीर हादसा हो सकता है।