कोरबा। कोयला खनन सहित अन्य कार्यों में एसईसीएल की इंधन आवश्यकता पर हर महीने कई करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। एसईसीएल अपने स्तर पर विभिन्न तेल कंपनियों से डीजल खरीद रही है। खबर है कि कोरबा जिले की कुछ खदानों से लगातार डीजल पार हो रहा है। आंकलन है कि हर दिन में 25 से 30 हजार लीटर डीजल चोरी हो रहा है। इससे कंपनी को नुकसान हो रहा है और सुरक्षा पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कोरबा पश्चिम क्षेत्र में संचालित एसईसीएल की खदानों में इस तरह का काम काफी समय से चल रहा है। कोल इंडिया के द्वारा दिए गए उत्पादन लक्ष्य को पूरा करने के लिए एसईसीएल को द्रुत गति से काम करना है। भारी भरकम संसाधन देने के साथ संचालन हेतु काफी मात्रा में डीजल की खपत यहां पर हो रही है। वाहनों में प्रतिदिन उपयोग में आने वाली मात्रा का काफी हिस्सा चोरों की भेंट चढ़ रहा है। गेवरा, दीपका और कुसमुंडा क्षेत्र की खदानें चोरों के निशाने पर हैं। इस तरह का प्रदर्शन कई बार हो चुका है। खदानों के आसपास के कई लोग चोरी के काम में जुटे बताए जाते हैं। यहां से पार किया गया डीजल विभिन्न क्षेत्रों में बेचा जा रहा है, ऐसे दावे किये जा रहे हैं। जानकारों का कहना है कि अकेले तीन खदान से ही हर दिन लगभग 30 हजार लीटर डीजल की चोरी हो रही है।अन्य क्षेत्रों की खदानों में भी ऐसा काम चल रहा है। इससे एसईसीएल को हो रहे नुकसान का आंकलन आसानी से किया जा सकता है।
2010 से सीआईएसएफ को जिम्मेदारी
एसईसीएल के द्वारा बीते वर्षों में विभागीय सुरक्षा के अलावा एक्स सर्विसमेन एजेंसियों को सुरक्षा के काम में लगाया गया था। वर्ष 2010 में सीआईएसएफ की एक कंपनी को इसकी जिम्मेदारी दी गई है। कंपनी के सूत्र बताते हैं कि इस काम को संभालने के बाद घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए जरूरी कोशिश की गई। चोरी की घटनाओं में क्या कुछ नुकसान हो रहा है, इस बारे में एसईसीएल प्रबंधन ही बेहतर बता सकता है।
सुरक्षा आंतरिक मामला
दूसरी ओर पुलिस का कहना है कि खदान क्षेत्रों में इस तरह की गतिविधियों का जहां तक सवाल है यह एसईसीएल का सुरक्षा संंबंधी आंतरिक मामला है। उसने अपने स्तर पर व्यवस्था कर रखी है। क्षेत्राधिकार में सूचनाएं मिलने पर जरूरी कार्यवाही की जाती है।