नईदिल्ली २५ अप्रैल [एजेंसी]।
कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने दिल्ली, मुंबई जैसे बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों में भी हाहाकार जैसी स्थिति पैदा कर दी है। संक्रमण की यह दूसरी लहर कोरोना वायरस के बदले हुए प्रतिरूपों के कारण अधिक तेज है। फिलहाल अस्पतालों में कोरोना मरीजों का तांता लगा है। डॉक्टर और नर्स उनका उपचार बहुत लगन से कर रहे हैं, लेकिन संक्रमण का प्रकोप इतना भयंकर है कि ऑक्सीजन से लेकर दवाइयों तक की किल्लत है। तमाम अस्पतालों में तो एक-एक बेड पर दो-दो मरीज हैं।
कोविड महामारी से ग्रस्त कई मरीजों को ऑक्सीजन देने की जरूरत पड़ती है। स्थिति बिगडऩे पर रेस्परेटर लगाने पड़ते हैं। कितने ही अस्पताल ऐसे हैं, जहां मरीजों की अधिक संख्या के चलते रेस्परेटर पर्याप्त नहीं साबित हो रहे हैं।
स्थिति गंभीर होने के कारण जनमानस डरा हुआ है और हालात संभलते न देख व्याकुल है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर ने जिस व्यापकता के साथ देश को चपेट में ले लिया है, उसकी उम्मीद शायद नीति-नियंताओं और डॉक्टरों को भी नहीं थी। सवाल है कि जब अन्य देश कोरोना की दूसरी-तीसरी लहर से दो-चार हो रहे थे तो हमारे नीति-नियंता यह मानकर क्यों चल रहे थे कि भारत में ऐसा नहीं होगा। जनवरी-फरवरी में जब पहली लहर थोड़ी थम सी गई तो पता नहीं क्यों सरकारों से लेकर डॉक्टर तक सभी आश्वस्त हो गए कि देश महामारी से उबर रहा है। नतीजा यह हुआ कि जिस स्वास्थ्य ढांचे को सशक्त करने की कोशिश पिछले साल अगस्त-सितंबर में शुरू हुई थी, उसमें ढिलाई आ गई। इसी के साथ लोग भी लापरवाह हो गए।