नगर संवाददाता
कोरबा। रिहायशी क्षेत्र में चल रहा भैंस खटाल लोगों को परेशानी कोरबा नगर पालिक निगम के द्वारा गोकुल नगर में मवेशियों को शिफ्ट कर दिए जाने के बावजूद अभी भी रिहायशी क्षेत्रों में खटाल का संचालन अवैध रूप से किया जा रहा है। इसके कारण आसपास के जनजीवन पर बुरा असर पड़ रहा। जल जनित और कीट जनित बीमारियों की रोकथाम के लिए चलाए जा रहे प्रयासों को भी ऐसी गतिविधियों से पलीता लग रहा है। आश्चर्य की बात यह है कि इस तरह की तस्वीरें कोरबा के वार्ड क्रमांक 14 में बनी हुई है।
कुछ पहले ही नगर निगम के द्वारा अभियान चलाते हुए वैगन दहाड़ और रामपुर क्षेत्र के डेयरी कारोबारियों को सुरक्षा कारणों से हटाते हुए गोकुल नगर खरमोरा में शिफ्ट करने की कार्रवाई की गई थी। लोगों को वहां पर अपने व्यवसाय के लिए काफी कम दर पर जमीन उपलब्ध कराई गई है, और बुनियादी सुविधाएं भी दी गई हैं। इस योजना के साथ दावे किए गए थे कि शहरी क्षेत्र में कहीं भी मवेशियों को पालने और व्यवसाय करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। इन सबके बावजूद कोरबा के पंप हाउस झोपड़ी पारा मिशन रोड राताखार और कृष्णा नगर क्षेत्र में अवैध रूप से खटाल संचालित की जा रही है। यह सभी घनी आबादी वाले क्षेत्र हैं। यहां पर साफ सफाई की व्यवस्था के लिए नगर निगम को भारी भरकम खर्च करना पड़ रहा है। इसके साथ ही बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए कई इंतजाम करने पड़ रहे हैं। पूर्ण महामारी के दौर में कई प्रकार के जोखिम बनी हुई है इन पर नियंत्रण करने के लिए स्वच्छता कर्मियों के साथ-साथ नगर पालिक निगम और स्वास्थ विभाग के अमले को काफी जोखिम उठानी पड़ रही है। इन सब के उलटे आवासी क्षेत्रों में मवेशियों से जुड़े व्यवसाय किए जाने से अपरंपार गंदगी का साम्राज्य कायम हो गया है। चौतरफा गंदगी और दुर्गंध का माहौल होने से आसपास में रहने वाले लोगों के सामने कई तरह की दुश्वारियां बनी हुई हैं। लोगों को इस बात पर आश्चर्य हो रहा है कि जब गोकुल नगर की अवधारणा पर काम किया गया है तो फिर आवासी क्षेत्रों में मवेशियों का पालन पोषण और व्यवसायिक रूप से कामकाज आखिर कैसे चल रहा है। पंप हाउस झोपड़ी पारा में 10 से अधिक खटाल का संचालन होने से यहां की आंगनबाड़ी बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। क्योंकि कार्यकर्ता से लेकर यहां के बच्चे दूरी बनाने लगें।