जांजगीर-चाम्पा। शिवरीनारायण चारों युग की नगरी है अलग-अलग युग में इसके अलग-अलग नाम होने के उल्लेख प्राप्त होते हैं सतयुग में इसे बैकुंठपुर, त्रेतायुग में इसका नाम रामपुर तथा द्वापर में इसे विष्णुपुरी या नारायणपुरी के नाम से जाना गया वर्तमान में अब हम सब इसे शिवरीनारायण के नाम से जानते हैं। विदित हो कि शिवरीनारायण पूरे छत्तीसगढ़ में चर्चा का विषय बना हुआ है यहां एक दिवसीय मानस महोत्सव में राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने शिवरीनारायण मठ पीठाधीश्वर एवं राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेश्री डॉक्टर महन्त रामसुन्दर दास सहित आयोजन समिति को अपने आगमन की अनुमति प्रदान कर दी है उनका आगमन 29 नवंबर 2020 दिन रविवार को दोपहर 1:00 बजे होगा शिवरीनारायण हर युग में प्रतिष्ठित रहा है यहां आकर के जीव को मोक्ष की प्राप्ति होती है कारण कि यह भगवान विष्णु का धाम है यहां की विशेषता यह है कि यह नगर महानदी (चित्रोतपला गंगा) की त्रिवेणी संगम तट पर स्थित है जोक नदी, महानदी और शिवनाथ नदी तीनों मिलकर यहां प्रयागराज तीर्थ की तरह ही इसे प्रतिष्ठित करते हैं। यहां छठवीं -सातवीं शताब्दी का बना हुआ अत्यंत प्राचीन भव्य मंदिर है, जहां भगवान नर- नारायण के रूप में विराजित हैं भक्तगण इसे राम और लक्ष्मण के रूप में भी इनकी पूजा करते हैं। मंदिर की ऊंचाई 172 फीट है तथा यह 136 फीट की परिधि में निर्मित है। शिखर पर 10 फीट ऊंचा स्वर्ण कलश विद्यमान है जिसमें भगवान सूर्यनारायण की आकृति बनी हुई है। लंबाई, चौड़ाई और ऊंचाई के आधार पर इसे बड़े मंदिर के नाम से जाना जाता है। गर्भ गृह के मुख्य द्वार पर दोनों ओर भगवान विष्णु के द्वारपाल जय और विजय जिसे शंख पुरुष तथा चक्र पुरुष के नाम से भी जाना जाता है की आदम कद प्रतिमा प्रतिष्ठित है। गर्भ गृह का दरवाजा चांँदी से बना हुआ है अंदर जगमोहन में भगवान लक्ष्मीनारायण विराजित हैं बाहर के जगमोहन में गरुड़ जी एवं हनुमान जी की प्रतिमा स्थित है साथ ही यहां पर माता दुर्गा की प्रतिमा भी बाद के वर्षों में स्थापित की गई है। शिवरीनारायण धाम को भारतवर्ष के चार धामों के मध्य में स्थित गुप्त धाम के नाम से भी जाना जाता है, इस नगर के नाम का उल्लेख रामावतार चरित्र में ही नहीं बल्कि महर्षि याज्ञवल्क्य के द्वारा लिखित याज्ञवल्क्य संहिता में भी प्राप्त होता है।यह मंदिरों का नगर है यहां अनेक स्थानों पर अनेक मंदिर हैं लेकिन मुख्य रूप से भगवान शिवरीनारायण का दर्शन जीव के लिए मोक्ष प्रद माना गया है। रामचरित मानस में गोस्वामी तुलसीदास ने लिखा है कि मम दरसन फल परम अनूपा। जीव पाव निज सहज सरूपा।। अर्थात भगवान के दर्शन प्राप्त करने के पश्चात जीव अपने सहज स्वरूप में आ जाता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। भगवान के चरण कमल में रोहणी कुंड स्थित है भगवान की स्तुति में कहा गया है कि कुण्ड रोहिणी चरण कमल पर, गिरधारी गिरिवर धरणमतुण्ड चाप शबरी के बदरी, नाम अर्ध्दगीवद् करणमा लाल बनैं लैलार बृन्द, भुज देहुनाथ सुंदर वरणम् जय सिंदूर गिरि राजै शिवरीनारायण तारण तरणम्।