Sheorinarayan Temple chhattisgarh

जांजगीर-चांपा। पूरे देश में इन दिनों रामराज की बातें चल रही हैं। राम मंदिर के निर्मांण को लेकर लोगों में उत्सुकता है, इसके साथ ही प्रभु श्रीराम के वन पथ गमन मार्ग के स्थलों को भी चिन्हित किया जा रहा है। छत्तीसगढ़ में मंदिरों के शहर के नाम से विख्यात शिवरीनारायण में स्थित प्रसिद्ध नरनारायण मंदिर में भगवान शबरीनारायण प्रतिष्ठित हैं। यहां प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से लेकर शिवरात्रि तक विशाल मेला लगता है, जो इन दिनों अपने पूरे शबाब पर है। महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी का संगम होने के कारण यह स्थान त्रिवेणी संगम कहलाता है।
धार्मिक नगरी शिवरीनारायण कई मायनों में खास है। यह नगर एक बड़ा व्यापारिक केन्द्र होने के साथ ही टेम्पल सिटी के नाम से विख्यात है। यहां माघ महीने में प्रतिवर्ष 15 दिवसीय मेला लगता है, जो इन दिनों अपने शबाब पर है। कहा जाता है कि वनवास काल के दौरान प्रभु श्रीराम ने इस स्थान पर भिलनी शबरी से मुलाकात की थी और उसके जूठे बेर भी खाए थे। धार्मिक मान्यता है कि यहां माघ के महीने में प्रभु श्री नरनारायण साक्षात रूप में विराजमान होकर श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं। यहां महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के संगम में अस्थि विसर्जन और संगम किनारे पिंडदान, श्राद्ध व तर्पण किया जाता है। हर साल माघ महीने में यहां मेले का आयोजन होता है, जो इन दिनों चल रहा है। इस मेले में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की झलकियां देखने को मिलती हैं। कहा जाता है कि हजारों वर्षों से इस संगम स्थल पर यह मेला ऐसे ही सजता आ रहा है। माघ माह की पूर्णिमा को यहां संगम में स्नान का अपना अलग महत्व है। दूर-दूर से श्रद्धालु और साधु-संतों की टोलियां यहां माघी मेले में शामिल होने और पुण्य स्नान के लिए आती हैं।