
नई दिल्ली। रूसी सशस्त्र बलों में काम करने वाले भारतीयों के बारे गुरुवार को राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। कीर्ति वर्धन सिंह ने एक सवाल के लिखित जवाब में बताया कि 12 भारतीय नागरिक पहले ही रूसी सशस्त्र बलों को छोड़ चुके हैं, जबकि अन्य 63 व्यक्ति जल्दी काम छोडऩा चाह रहे हैं। सिंह ने कहा कि आठ भारतीयों के मारे जाने की खबर है।उन्होंने कहा कि सरकार को कुछ भारतीय नागरिकों के नौकरी छोडऩे का अनुरोध प्राप्त हुआ है, जिन्हें अस्पष्ट परिस्थितियों में रूसी सशस्त्र बलों में भर्ती किया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसे भारतीय नागरिकों की सही संख्या ज्ञात नहीं है। मंत्री ने कहा कि सरकार ने चार भारतीय नागरिकों के शव भारत लाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की है। उन्होंने कहा कि रूस की सरकार ने कहा है कि मृत व्यक्तियों के परिवारों को मुआवजा प्रदान किया जाएगा।विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने राज्यसभा को बताया कि बैंकॉक स्थित भारतीय दूतावास ने अब तक 300 से अधिक उन भारतीय नागरिकों को वापस स्वदेश भेजने में मदद की है। सभी नागरिक थाईलैंड के पड़ोसी देशों में विभिन्न घोटालों में फंस गए थे। एक सवाल के लिखित जवाब में ङ्क्षसह ने कहा कि थाईलैंड के पड़ोसी देशों म्यांमार, कंबोडिया और लाओस में गुजरात सहित देश के विभिन्न हिस्सों से भारतीय नागरिकों के विभिन्न घोटालों में फंसने के मामले सरकार के संज्ञान में आए हैं।सरकार ने गुरुवार को राज्यसभा को बताया कि 2023 में 2.16 लाख से अधिक भारतीयों ने अपनी नागरिकता छोड़ दी है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने पिछले पांच वर्षों में नागरिकता छोडऩे वाले भारतीयों पर पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में यह बात कही। अपने जवाब में उन्होंने 2011-2018 का संबंधित डेटा भी साझा किया।उन्होंने बताया कि 2022 में 2.25 लाख, 2021 में 1.63 लाख, 2020 में 85,256 और 2019 में 1.44 लाख लोगों ने भारतीय नागरिकता छोड़ी है। मंत्री ने कहा कि नागरिकता छोडऩे का कारण व्यक्तिगत हैं।इस साल तीन देशों में ङ्क्षहसा या हमलों में भारत के सात छात्रों की मौत हुई है। विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने पिछले पांच वर्षों के दौरान विदेशों में हमलों में मारे गए भारतीय छात्रों की संख्या पर पूछे गए सवालों के लिखित जवाब में राज्यसभा में डेटा साझा किया है।