
कोरबा। हर तरफ से मिल रहे संरक्षण के कारण कोरबा शहर और ग्रामीण क्षेत्र में रेत माफियाओं की चांदी है। सबसे हैरत की बात यह है शहरी क्षेत्र में चोरी का काम बेखोफ तरीके से चल रहा है। दिन में आराम फरमाने के बाद चोरों की गैंग अपने वाहनों के जरिए रात को इस कारनामे को अंजाम दे रही है। सर्वमंगला नगर क्षेत्र में बड़े हिस्से की सडक़ की दुर्गति इसके चलते हो गई है और ऐसे में आवाजाही करने वाला वर्ग परेशान हो रहा है।
पिछले कुछ महीनो से इस प्रकार की गतिविधियां यहां पर जारी है, ऐसा भी नहीं है। लंबे समय से यह सब दौर जारी है। हसदेव और अहिरन नदी के बड़े हिस्से को रेत चोरों ने अपना सबसे बड़ा टारगेट बना रखा है और वहां से गौड़ खनिज की चोरी धड़ल्ले से की जा रही है। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के द्वारा 15 जून से 15 अक्टूबर तक के लिए खनन संबंधी गतिविधियों पर रोक लगाई जाने के बावजूद इस इलाके में यह सब काम चलता रहा, वह भी पूरी रफ्तार से। और जब प्रतिबंध हट गया है, तब भी अवैध खनन संबंधित कामकाज चल रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि दिन के उजाले में सब कुछ सामान्य रहता है लेकिन रात होने के साथ कोरबा नगर के नजदीक हसदेव और अहिरन नदी से रेत की चोरी और परिवहन पूरी गति से हो रहा है। चोरी चकारी के काम में जुटा हुआ माफिया तंत्र हर रोज मोटी कमाई करने में सफल हो रहा है। स्थिति ऐसी हो गई है कि नगर निगम कोरबा क्षेत्र के सर्वमंगला नगर वार्ड से होकर संचालित होने वाला रेट खनन और परिवहन का अवैध काम यहां की सडक़ों का सत्यानाश करने का सबसे बड़ा जरिया बना हुआ है। जानकार बताते हैं कि इस काम में लगे हुए लोगों को अलग-अलग स्तर से संरक्षण मिला हुआ है इसलिए कोई भी नियंत्रण को लेकर दिलचस्पी नहीं दिख रहा है। लेकिन इस प्रकार की गतिविधियों के कारण इस इलाके की सडक़ खस्ताहाल हो गई है और उनमें बेमौसम बारिश का पानी भर गया है। इन सब कारणों से क्षेत्र के लोग परेशान हो रहे हैं जिनके सामने यहां से होकर आवागमन करना काफी मुसीबत भरा बना हुआ है। नागरिक इस बात पर हैरानी जताते हैं कि सब तरफ से जानकारी प्राप्त होने के बावजूद इस मामले में उदासीनता आखिर क्यों दिखाई जा रही है और इसके पीछे आखिर सरकारी तंत्र के सामने क्या कुछ मजबूरी है।
औपचारिक कार्रवाई तक सिमटा तंत्र
पूरे मामले की जानकारी होने पर खनिज विभाग हाथ पैर हाथ धरे बैठा है। यह बात अलग है कि बहुत ज्यादा दबाव होने की स्थिति में औपचारिक तरीके से वाहनों को पकडऩे और पेनाल्टी करने की कार्रवाई जरूर की जाती है। सवाल उठ रहा है कि सरकारी संपदा की चोरी करने का काम जो लोग कर रहे हैं उनके वाहनों को राजसात करने की कार्रवाई आखिर क्यों नहीं की जा रही है।






























